इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक बुधवार को समाप्त हो गई। डेली कॉलेज में 2 नवंबर से चल रही इस बैठक में देशभर से करीब 400 प्रतिनिधि शामिल हुए। समापन के बाद सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने आरक्षण, मंदिरों के मामलों, संगठन विस्तार, SIR, संघ के पंजीयन और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर संघ का पक्ष रखा। आरक्षण पर होसबाले ने कहा कि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को जब तक समान अवसर नहीं मिलते, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। इसका लाभ सभी पात्र लोगों तक पहुंचना चाहिए। आरक्षण सामाजिक और ऐतिहासिक परिस्थितियों के आधार पर हो, राजनीति के लिए नहीं। कृष्ण जन्मभूमि समेत अदालतों में चल रहे मंदिरों के मामलों पर उन्होंने कहा, ‘हमें राम मंदिर बनाकर दिखाना था, वह हमने बना दिया। बाकी मामले कोर्ट में चल रहे हैं, उन्हें वहीं रहने देना चाहिए।’ डॉक्टर, सीए और शिक्षकों के घर पहुंचे प्रांत प्रचारक संघ की बैठक के बाद अंतिम दिन अलग-अलग पेशे के प्रतिष्ठित लोगों के साथ भोजन के जरिए संवाद और संपर्क बढ़ाने की पहल की गई। प्रांत प्रचारकों को शहर के डॉक्टरों, चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए), शिक्षाविदों और कोचिंग- कॉलेज संचालकों के बीच भेजा गया। इन सभी के लिए अलग-अलग समूहों में भोजन की व्यवस्था की गई थी। इसका उद्देश्य समाज के अलग-अलग प्रोफेशनल वर्गों से सीधा जुड़ाव बढ़ाना और उनके साथ संवाद स्थापित करना था। बॉम्बे हॉस्पिटल के राहुल पाराशर के यहां प्रांत प्रचारक और डॉक्टरों ने साथ भोजन किया। वहीं शहर की प्रमुख कोचिंग संस्थाओं और कॉलेजों के संचालकों ने एक स्थान पर जुटकर भोजन किया। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का अलग समूह बनाया गया, जिन्होंने एक साथ भोजन किया। इन मुलाकातों में संघ के कुछ कार्यकारिणी सदस्य भी शामिल हुए। एक साल में 10,241 नए स्थानों तक पहुंचा संघ होसबाले ने बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष में संगठन का विस्तार हुआ है। एक साल में संघ की पहुंच 10,241 नए स्थानों तक बढ़ी है। अब देश के 63,208 स्थानों पर 99,423 शाखाएं संचालित हो रही हैं। इसके अलावा 34,982 साप्ताहिक मिलन और 14,096 मासिक मंडलियां भी चल रही हैं। इन गतिविधियों के जरिए संघ की पहुंच कुल 1,03,397 स्थानों तक हो गई है। सामाजिक एकता और समरसता के लिए देशभर में 94,218 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। संघ के मुताबिक, इनमें करीब पांच करोड़ लोगों ने भाग लिया। बंगाल में 150 गुना बढ़ीं शाखाएं, केरल के हर गांव तक पहुंचने का दावा संघ की शाखाओं के विस्तार पर होसबाले ने कहा कि पश्चिम बंगाल में शाखाओं की संख्या पहले की तुलना में 150 गुना बढ़ी है। पहले वहां शाखाएं लगाने का विरोध होता था। त्रिपुरा और असम में संघ के कई कार्यकर्ताओं की हत्या भी हुई, लेकिन संगठन का काम जारी रहा। मिजोरम में दो जगह और लद्दाख में भी शाखाएं शुरू की गई हैं। उन्होंने दावा किया कि केरल के सभी गांवों में संघ की शाखाएं हैं। नशे के शिकार युवाओं की काउंसलिंग करेगा संघ होसबाले ने कहा कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए संघ विशेष योजना बनाएगा। जो युवा ड्रग्स और नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं, उनकी काउंसलिंग की जाएगी। युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर भी काम होगा। उन्होंने बताया कि नवंबर-दिसंबर में संघ के प्रांतों में संघचालकों का निर्वाचन और नई कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा। इसके बाद देशभर के 88 संभागों में संगठन के काम की योजना तैयार होगी। मोबाइल से दूर रखने के बजाय बच्चों को संस्कार दें नए जनसंचार माध्यमों और मोबाइल के इस्तेमाल पर होसबाले ने कहा कि तकनीक को रोकना आसान नहीं है। बच्चों को इंटरनेट और मोबाइल से पूरी तरह दूर रखने के बजाय उन्हें सही संस्कार देना जरूरी है। स्कूल, कॉलेज और सामाजिक संस्थाओं की इसमें अहम भूमिका है। माता-पिता को तय करना चाहिए कि बच्चों को किस उम्र में डिवाइस देना है और वे कितनी देर उसका इस्तेमाल करें। उन्होंने परिवारों से अपील की कि दिन में या सप्ताह में आधा से एक घंटा मोबाइल से दूर रहकर सभी सदस्य साथ बैठें और सकारात्मक विषयों पर बातचीत करें। मंदिर जाने वाले लोग बच्चों को भी साथ ले जाएं और उन्हें धार्मिक-सामाजिक परंपराओं का महत्व समझाएं। उन्होंने कहा कि संघ पंच परिवर्तन के तहत परिवार में संस्कार और संवाद पर जोर दे रहा है। लेफ्ट का वैलिडेशन नहीं, समाज का साथ चाहते हैं संघ की विचारधारा को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर मिल रहे समर्थन के बावजूद वामपंथियों से मान्यता चाहने के सवाल पर होसबाले ने कहा कि संघ को लेफ्ट के वैलिडेशन की जरूरत नहीं है। संघ समाज का साथ चाहता है। उन्होंने कहा, 'अगर हम लेफ्ट का वैलिडेशन चाहते तो हमारा बोरिया-बिस्तर उठ चुका होता। हमारे लिए उनका वैलिडेशन कोई मायने नहीं रखता।' 80 देशों में संघ के स्वयंसेवक, अंतरराष्ट्रीय संगठन बनाने का इरादा नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघ के विस्तार के सवाल पर होसबाले ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक 80 देशों में प्रेरणा के साथ काम कर रहे हैं, लेकिन कोई अंतरराष्ट्रीय संगठन बनाने का उद्देश्य नहीं है। उन्होंने बताया कि संघ प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क, लंदन और टोरंटो में कार्यक्रम हुए हैं। वे वहां स्वामीनारायण मंदिर और खालसा गुरुद्वारा भी गए। स्थानीय विश्वविद्यालयों में लोगों से संवाद किया। इन कार्यक्रमों में विदेशी लोगों ने भारत में संघ की कार्यपद्धति को समझने और उसमें रुचि दिखाई। SIR पर बोले- मतदाता सूची का परीक्षण नियमित प्रक्रिया SIR पर होसबाले ने कहा कि मतदाता सूची का समय-समय पर परीक्षण होना चाहिए। यह सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि 13 करोड़ नाम हटाए जाने की बात कही जा रही है, जबकि उनके मुताबिक ये लोग अब दुनिया में नहीं हैं। होसबाले ने बताया कि उन्हें भी नोटिस मिला था, क्योंकि उन्होंने अपने गांव के बजाय बेंगलुरु से मतदान किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि मतदाता सूची के परीक्षण पर राजनीति क्यों होनी चाहिए। पंजीयन की कोई कानूनी बाध्यता नहीं संघ के पंजीयन पर होसबाले ने कहा कि संघ समाज का अंग है और कई संगठन ऐसे हैं, जिनका पंजीयन नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ के पंजीयन की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। संगठन देश के संविधान और कानून के अनुसार काम कर रहा है। बाढ़-चक्रवात प्रभावित 42,200 परिवारों तक पहुंचाई मदद होसबाले ने संघ के सेवा कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि असम के शिवसागर और जोरहाट जिलों में 1,600 से अधिक स्वयंसेवकों ने करीब 42,200 परिवारों तक भोजन, पानी और दवाइयां पहुंचाईं। बाढ़ से 805 गांव प्रभावित हुए थे और 1,500 से अधिक मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। करीब 150 परिवारों को मकानों के पुनर्निर्माण के लिए सामग्री भी दी गई। ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में चक्रवात से मकानों, फसलों और पशुधन को नुकसान पहुंचा। कई जगह नारियल के हजारों पेड़ उखड़ गए और चार-पांच दिन तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। स्वयंसेवकों ने प्रभावित मछुआरों और किसानों की मदद की। युवाओं को भड़काने के पीछे हो सकती है साजिश रीजीम चेंज यानी शासन व्यवस्था में बदलाव के मुद्दे पर होसबाले ने कहा कि समाज में अशांति फैलाना और हिंसा के जरिए बदलाव लाना देशहित में नहीं है। युवाओं को भड़काने की कोशिश के पीछे साजिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि युवाओं से संवाद कर उनकी सोच और समस्याओं को समझना जरूरी है। युवाओं में प्रतिभा और कौशल है। उन्हें सकारात्मक दिशा देने की जरूरत है। होसबाले ने बताया कि संघ ने कॉलेज के युवाओं को सीमावर्ती क्षेत्रों से जोड़ने का कार्यक्रम भी किया था। युवाओं की वास्तविक समस्याओं और मांगों का प्रशासनिक स्तर पर समाधान होना चाहिए। बैठक में समाजसेवी महापुरुषों के कार्यों को आगे बढ़ाने, Gen-Z के बदलते रुझानों और शिक्षा के क्षेत्र में विद्या भारती की भूमिका पर भी चर्चा हुई।