राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अगले तीन साल सामाजिक समरसता, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली, कुटुंब प्रबोधन, स्व का भाव और नागरिक कर्तव्य जैसे पांच विषयों पर फोकस करेगा। संघ ने इन्हें पंच परिवर्तन नाम दिया है। शताब्दी वर्ष के दौरान इन विषयों को समाज तक पहुंचाने के लिए गृह संपर्क अभियान, सम्मेलन और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इंदौर में सोमवार को शुरू हुई अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की तीन दिवसीय बैठक में इन कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना पर मंथन हुआ। बैठक के बाद अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने जेन-जी आंदोलन से जुड़े सवाल पर कहा कि देश में कोई आवाज उठाता है तो संघ को पक्ष-विपक्ष के नजरिए से क्यों देखा जाता है। उन्होंने कहा कि सभी को ध्यान रखना चाहिए कि आंदोलन देशहित में हो। संघ इस विषय में सतर्क रहता है और आगे भी रहेगा। महिलाओं और युवाओं को जोड़ने पर चर्चा शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी रही। बैठक में इस अनुभव के आधार पर महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए नए कार्यक्रमों और उपक्रमों पर विचार किया गया। युवाओं को जोड़ने के लिए शहरों, गांवों और कॉलेज कैंपस में आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा हुई। इनमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और अन्य युवाओं ने हिस्सा लिया था। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान बैठक के एजेंडे में युवाओं में नशीली दवाओं के बढ़ते चलन पर चिंता और इससे निपटने के प्रयास भी शामिल रहे। आंबेकर ने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर प्रयास जरूरी हैं। युवाओं को नशीली दवाओं से दूर रखने के लिए सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाने पर विचार होगा। उन्होंने बताया कि पिछली समन्वय बैठक में संघ से प्रेरित विभिन्न संगठनों ने भी अपने क्षेत्रों में नशे के खिलाफ अभियान शुरू करने की जानकारी दी थी। देशभर में 1.01 लाख से ज्यादा दैनिक शाखाएं आंबेकर के मुताबिक, देशभर में संघ की दैनिक शाखाओं की संख्या बढ़कर 1 लाख 1 हजार 151 हो गई है। साप्ताहिक और मासिक मिलन को मिलाकर संघ का काम 1 लाख 10 हजार 849 स्थानों तक पहुंच गया है। पिछले साल अक्टूबर की तुलना में शताब्दी वर्ष के दौरान 13 हजार से अधिक नई दैनिक शाखाएं जुड़ी हैं। बैठक में शाखाओं के विस्तार के प्रयासों और उनके परिणामों की समीक्षा की गई। शाखाओं के साथ साप्ताहिक और मासिक मिलन की गतिविधियों को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। शताब्दी वर्ष में 65 हजार से ज्यादा हिंदू सम्मेलन शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में 65 हजार 660 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। आंबेकर ने बताया कि शहरों में बस्ती स्तर पर और ग्रामीण क्षेत्रों में आठ-दस गांवों को मिलाकर बनाए गए मंडल स्तर पर सम्मेलन हुए। कई जगह दो-तीन मंडलों को मिलाकर भी आयोजन किए गए। इन सम्मेलनों में कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा और समाज के विभिन्न वर्गों से समर्थन मिला। लोगों ने शाखाओं से जुड़ने की इच्छा जताई। सामाजिक संस्थाओं और संगठनों ने भी अपने कार्यक्रमों में स्वयंसेवकों के अनुभवों का सहयोग लेने की इच्छा व्यक्त की। बैठक में इन आयोजनों से मिले अनुभवों और सामाजिक सहभागिता की समीक्षा की गई। समाज तक तथ्यात्मक जानकारी पहुंचाने पर जोर बैठक में सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर जन-जागरण को लेकर भी चर्चा हुई। आंबेकर के मुताबिक, संघ का प्रयास रहेगा कि समाज के सभी वर्गों तक तथ्यात्मक जानकारी सही परिप्रेक्ष्य में पहुंचे। इसके लिए उचित दृष्टिकोण पहुंचाने की जरूरत पर विचार किया गया। भागवत के विदेश प्रवास के अनुभव साझा किए बैठक में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के विदेश प्रवास और वहां मिले अनुभवों पर भी चर्चा हुई। शताब्दी वर्ष के संदर्भ में अगस्त और सितंबर में वे अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम गए थे। इस दौरान उन्होंने वहां के प्रमुख लोगों से संवाद किया और विभिन्न सम्मेलनों में विचार रखे। आंबेकर के अनुसार, भागवत ने वहां हिंदुत्व की अवधारणा और भारत की उस दृष्टि को सामने रखा, जिसमें दुनिया के सभी लोग एक साथ सुखपूर्वक रह सकते हैं। भारत की शक्ति बढ़ने का उद्देश्य दुनिया का कल्याण होना चाहिए, इस विचार को भी उन्होंने प्रमुखता से रखा। बैठक में शामिल पदाधिकारियों का दिन सुबह 6 बजे शुरू बैठक में शामिल पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का दिन सुबह 6 बजे से शुरू हो रहा है। सुबह शाखा और अन्य गतिविधियों के बाद अलग-अलग सत्रों में चर्चा होती है। दिनभर बैठकों और विचार-विमर्श का सिलसिला रात करीब 8 बजे तक जारी रहता है। इस तरह पहले दिन बैठक और संगठनात्मक गतिविधियां करीब 14 घंटे चलीं।