पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर शनिवार को शिवगंज स्थित कांग्रेस कार्यालय में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। पूर्व विधायक एवं पूर्व मुख्यमंत्री सलाहकार संयम लोढ़ा के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम में दोनों नेताओं को पुष्पांजलि अर्पित कर उनके जीवन, संघर्ष और देश के निर्माण में योगदान को याद किया गया। लोढ़ा ने कहा कि लोगों को इन महान नेताओं के जीवन के बारे में पढ़ना चाहिए, ताकि यह समझ सकें कि उन्होंने देश के लिए किस तरह काम किया और उनके जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र के लिए क्या योगदान दिया जा सकता है। स्वतंत्रता संग्राम से ही सक्रिय थीं इंदिरा गांधी लोढ़ा ने कहा कि इंदिरा गांधी बचपन से ही स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय थीं। उन्होंने 'बाल चरखा संघ' बनाया और 1930 में असहयोग आंदोलन के दौरान कांग्रेस की मदद के लिए बच्चों के साथ 'वानर सेना' का गठन किया। सितंबर 1942 में उन्हें जेल भी जाना पड़ा। वर्ष 1947 में महात्मा गांधी के मार्गदर्शन में उन्होंने दिल्ली के दंगा प्रभावित इलाकों में काम किया। विश्व राजनीति में भारत को दिलाई पहचान लोढ़ा ने कहा कि इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत को विश्व राजनीति में नई पहचान मिली। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद बांग्लादेश का निर्माण हुआ। बैंकों का राष्ट्रीयकरण, प्रिवी पर्स की समाप्ति, हरित क्रांति को बढ़ावा देने और गरीबों, किसानों व कमजोर वर्गों के हित में कदम उठाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य उनके कार्यकाल में हुए। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए कभी समझौता नहीं किया। देशहित में उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनका साहस, संघर्ष और राष्ट्र के प्रति समर्पण हमेशा लोगों को प्रेरित करता रहेगा। 562 से अधिक रियासतों का एकीकरण कर बनाई अखंड भारत की नींव सरदार वल्लभभाई पटेल को याद करते हुए लोढ़ा ने कहा कि वे राष्ट्रीय एकता, अखंडता, संगठन शक्ति और दृढ़ संकल्प के प्रतीक थे। उन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूती दी। खेड़ा और बारडोली के किसान आंदोलनों के माध्यम से किसानों की आवाज बुलंद की। लोढ़ा ने कहा कि आजादी के बाद सरदार पटेल ने अपनी अद्भुत राजनीतिक सूझबूझ, दृढ़ इच्छाशक्ति और संगठन क्षमता के बल पर देश की 562 से अधिक रियासतों का एकीकरण कर अखंड भारत की नींव मजबूत की। देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय एकता और प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। राष्ट्र के प्रति समर्पण ही सच्ची श्रद्धांजलि लोढ़ा ने कहा कि सरदार पटेल का जीवन सिखाता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, दूरदर्शिता और राष्ट्र के प्रति समर्पण से असंभव दिखने वाले कार्य भी संभव किए जा सकते हैं। आज देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत बनाए रखना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।