केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 'लोकतंत्र बचाओ,अराजकता हटाओ' कार्यक्रम में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की भाषा और राजनीतिक आचरण पर जमकर निशाना साधा। अलवर शहर के कंपनी बाग के बाहर मंच से कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आज कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व, नीति और नीयत सब कुछ 'शून्य' हो चुका है। कांग्रेस को न तो किसी आंदोलन से मतलब है और न ही विकास से, उसे सिर्फ और सिर्फ 'कुर्सी' चाहिए। सिंधिया ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना उनके हालिया विरोध-प्रदर्शनों और संसद-सड़क के बयानों पर कड़ा ऐतराज जताया। विपक्ष का नेता चुने जाने का मतलब है कि आपके कंधों पर विपक्ष के नेतृत्व की जिम्मेदारी है। लेकिन झगड़ा करो, मुक्के लगाओ और आकाशवाणी के दफ्तर में घुसकर निजी सुरक्षाकर्मियों को धक्का दो-क्या यह एक नेता प्रतिपक्ष का व्यवहार होना चाहिए? कांग्रेस के लिए ही हुआ था शून्य का आविष्कार केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें तो ऐसा लगता है कि महान गणितज्ञ आर्यभट्ट ने 'शून्य' का आविष्कार शायद कांग्रेस पार्टी के लिए ही किया था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा-‘इनका नेतृत्व शून्य हो गया। इनकी नीति और नीयत शून्य हो गई। जनता ने इनके परिणामों को भी शून्य कर दिया है।’ सिंधिया ने कहा कि पिछले 35 सालों से कांग्रेस बिहार, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में लगातार शून्य पर सिमटती जा रही है। इसके बावजूद पार्टी अपनी कमियों को सुधारने के बारे में नहीं सोचती। हार पर चिंतन नहीं, पश्चाताप करना चाहिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग या चुनावी प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों पर सिंधिया ने कहा कि यह मामला वोट चोरी का नहीं है, बल्कि इस बात की छटपटाहट का है कि ‘मेरी कुर्सी पर कोई और कैसे बैठ गया।’ उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जीत और हार दोनों होती हैं। हार मिलने पर केवल आत्ममंथन या चिंतन नहीं, बल्कि 'पश्चाताप' करना चाहिए। राजनीतिक शुचिता और संस्कृति पर वार अपने परिवार की राजनीतिक परंपरा का जिक्र करते हुए सिंधिया ने कहा कि मेरे परिवार ने राजनीति का स्तर बनाए रखा है। नीति, नीयत और मुद्दों पर हम आमने-सामने हो सकते हैं, लेकिन राजनीति की गरिमा बनाए रखना हर जनसेवक की भूमिका होनी चाहिए। उन्होंने वर्तमान राजनीतिक माहौल पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री और उनके माता-पिता के खिलाफ जिस तरह की शब्दावली का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह हमारी संस्कृति और संस्कारों के बिल्कुल खिलाफ है। सड़क पर अराजकता फैलाकर लोकतंत्र पर धब्बा नहीं लगाया जा सकता। अगर जनता का विश्वास जीतना है तो झूठ और फरेब के आरोप लगाने के बजाय जनता के बीच जाकर काम करना होगा। कार्यक्रम के अंत में एक आध्यात्मिक संदेश देते हुए सिंधिया ने कहा कि जब व्यक्ति ऊपर जाता है, तो भगवान यह नहीं पूछता कि उसने कितनी बार मंत्री, सांसद या विधायक बनने का पद संभाला। वहां तो सिर्फ यह परखा जाता है कि दिए गए अवसर में इंसान ने एक अच्छा इंसान बनने का प्रयास किया या नहीं। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' का संकल्प लिया और राष्ट्र को सर्वोपरि रखने की बात दोहराई। मंत्री बोले- कांग्रेसियों के मन में बेईमानी केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि कांग्रेस के लोगों से कहना चाहता हूं कि SIR देश में नवीं बार हो रहा है। आठ बार तो कांग्रेस के राज में हुआ है। SIR के बाद चार चुनाव हुए। केरल कांग्रेस जीत गई। एसआईआर के बाद चुनाव गलत थे, तो कैसे वहां शपथ ले ली। सही बात यह है कि कांग्रेसियों के मन में बेईमानी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार 25 साल से देश के विकास में जुटे हैं। पूरा देश प्रधानमंत्री के साथ है। राज्य मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि देश में इंडी गठबंधन ने आंदोलन के माध्यम से अराकता पैदा कर रखी है। चुनी हुई सरकार व चुनाव आयोग पर सवाल कर अराजकता का माहौल पैदा करने का प्रयास करते हैं। कार्यक्रम में पूर्व सांसद डॉ करण सिंह, बीजेपी जिलाध्यक्ष अशोक गुप्ता, निवर्तमान जिला प्रमुख बलवीर छिल्लर व सरस डेयरी चेयरमैन नितिन सांगवान सहित काफी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे।