उदयपुर के रवींद्रनाथ टैगोर (आरएनटी) मेडिकल कॉलेज की एक और स्वास्थ्य पहल पूरे प्रदेश के लिए नजीर बनने जा रही है। सेतु प्रोजेक्ट की बड़ी सफलता के बाद अब उदयपुर का जन आरोग्य लिवर क्लीनिक (जेएएलसी) मॉडल पूरे राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में लागू किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने उदयपुर सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के अधीक्षक एवं गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विपिन कुमार माथुर को राज्यस्तरीय समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। डॉ. माथुर ने हाल ही मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के समक्ष इस प्रोजेक्ट का सफल प्रेजेंटेशन दिया था। योजना के तहत प्रदेशभर के लिवर क्लीनिकों को आपस में जोड़ने के लिए एक विशेष डिजिटल पोर्टल भी तैयार किया जा रहा है। 30% मरीजों को पता ही नहीं था कि लिवर दे रहा जवाब आरएनटी के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में यह क्लीनिक मई 2026 में राज्य में शुरू हुआ था। अब तक 5 माह में आए 1000 से अधिक मरीजों के डेटा विश्लेषण में सामने आया कि 30% मरीज हाई रिस्क कैटेगरी में थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इन मरीजों को अंदाजा तक नहीं था कि उनका लिवर गंभीर स्थिति में पहुंच चुका है। फिलहाल इस मॉडल में एनसीडी आरोग्य क्लीनिक (डायबिटीज, बीपी व मोटापा) के साथ लिवर स्क्रीनिंग को जोड़ा गया है। 50 हजार से 2 लाख तक आईसीयू का खर्च डॉ. माथुर ने बताया कि लिवर सिरोसिस जैसी बीमारियों की पहचान देर से होने पर मृत्यु दर अधिक रहती है। लिवर फेलियर के बाद आईसीयू भर्ती का खर्च 50 हजार से 2 लाख रुपए तक आता है। वहीं, शुरुआती स्तर पर 500 से 800 रुपए में होने वाली जांचों (एनएफटी, सोनोग्राफी व फाइब्रोस्कैन) से बीमारी पकड़ में आ जाती है। यानी 1 आईसीयू मरीज के खर्च में 100 से 200 लोगों की स्क्रीनिंग कर जान बचाई जा सकती है। तैयार होगी लिवर डिजीज रजिस्ट्री और बायोबैंक, डॉ. माथुर की अगुवाई में बनी विशेषज्ञ समिति चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल द्वारा जारी आदेशानुसार डॉ. माथुर की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यीय समिति प्रदेश में स्टेट लिवर डिजीज रजिस्ट्री और बायोबैंक की स्थापना का भी मार्गदर्शन करेगी। इससे लिवर बीमारियों के आंकड़ों का वैज्ञानिक संग्रह होगा, जिससे रिसर्च और नीतियों को नई दिशा मिलेगी। समिति के अध्यक्ष डॉ. विपिन कुमार माथुर होंगे, जबकि डॉ. केके शर्मा (एसएमएस, जयपुर) संयोजक एवं समन्वयक, डॉ. अनिल शर्मा (जीएमसी, कोटा), डॉ. साबिर हुसैन (एसएनएमसी, जोधपुर), डॉ. विनीता चौधरी (एसपीएमसी, बीकानेर) और डॉ. राज मणि (जेएलएनएमसी, अजमेर) को सदस्य बनाया गया है।