राजसमंद के श्रीनाथजी मंदिर में रविवार को भट्टी पूजन के साथ अन्नकूट महोत्सव की तैयारियां शुरू हो गईं। मंदिर के तिलकायत के निर्देश पर राजभोग दर्शन के बाद श्रीजी प्रभु के मुखिया इंद्रवदन गिरनारा ने परंपरा के अनुसार पूजा की। इस दौरान लाडले लाल प्रभु के मुखिया रजनीकांत, घनश्याम सांचीहर, श्रीनाथजी और लालन प्रभु के सेवक, अन्नकूट रसोई के मुखिया प्रवीण साचीहर और प्रचारक रमेश सांचीहर मौजूद रहे। भट्टी पूजन के बाद भोग की सामग्री बननी शुरू भट्टी पूजन के बाद सबसे पहले दाल से जुड़ी सामग्री तैयार की जाती है। इसके बाद तय तारीखों और परंपरा के अनुसार अन्नकूट महोत्सव में भगवान को चढ़ाए जाने वाले अलग-अलग पकवान बनाए जाते हैं। इसमें कंद, शाक, फीका पदार्थ, बालभोग की सामग्री, चावल, सेव, थूली, फली और कचरिया सहित कई तरह की सामग्री तैयार की जाती है। इस काम में 150 से ज्यादा सेवक जुटे हुए हैं। अन्नकूट महोत्सव में चावल का खास महत्व अन्नकूट महोत्सव में श्रीनाथजी को चढ़ाए जाने वाले भोग में चावल का खास महत्व है। इस मौके पर भगवान को करीब 40 से 50 क्विंटल चावल का भोग लगाया जाता है। उत्सव के दौरान प्रभु के सामने चावल का शिखर भी बनाया जाता है। भोग की सामग्री तैयार करते समय गुरु की आज्ञा, खान-पान के नियमों और सेवा की परंपराओं का पूरा ध्यान रखा जाता है। इस अवसर पर श्रीजी प्रभु के द्वितीय मुखिया प्रदीप, विभु सांचीहर, नरेश, राजेश, पराग, हर्षद, विजय, हितार्थ, लाला, ऋषिकेश, लक्ष्मीकांत, हेमंत, मंदिर के पंड्या परेश नागर, मीडिया प्रभारी गिरीश व्यास, राजेश्वर त्रिपाठी, महर्षि सहित कई सेवक मौजूद रहे।