सीकर नगर परिषद बोर्ड की पहली बैठक में मंगलवार को हंगामा हो गया। इस दौरान बीजेपी पार्षदों ने सभापति खतीजा बानो पर पक्षपात का आरोप लगाया और कहा कि हमें तो सदन में बोलने का मौका ही नहीं दिया। दरअसल, सभापति के निर्वाचन के बाद मंगलवार को बोर्ड की पहली बैठक हुई। शुरुआत में बैठक का माहौल सामान्य रहा, लेकिन जैसे ही नगर परिषद की 13 समितियों के गठन की घोषणा हुई, सदन में हंगामा शुरू हो गया। समितियों के गठन में दलगत राजनीति का आरोप भाजपा पार्षदों ने समितियों के गठन में दलगत राजनीति करने का आरोप लगाते हुए विरोध जताया। 13 समितियों में से केवल मेला समिति में ही भाजपा के पार्षद को अध्यक्ष बनाया गया। भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस से निर्वाचित सभापति खतीजा बानो और कांग्रेस पार्षदों ने राजनीतिक भेदभाव करते हुए भाजपा को समितियों में प्रतिनिधित्व नहीं दिया। विरोध के बीच बैठक समाप्त हो गई। इससे पहले बैठक में शहर के विकास और आमजन से जुड़े कई मुद्दों पर पक्ष-विपक्ष के पार्षदों ने सहमति जताई। सफाई कंपनी पर भ्रष्टाचार के आरोप, यूजर चार्ज वसूली पर उठाए सवाल वार्ड 32 से भाजपा पार्षद अशोक सैनी ने नगर परिषद की ओर से निजी कंपनी वी वॉयस के माध्यम से करवाई जा रही सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सफाई व्यवस्था में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है। कंपनी के ऑटो टीपर और सफाई कर्मचारी कुछ देर फील्ड में रहने के बाद वापस लौट जाते हैं। दूसरी ओर, आमजन से यूजर चार्ज वसूला जा रहा है, लेकिन सफाई व्यवस्था का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा। सैनी ने कहा कि दीपावली का सीजन होने के बावजूद कई वार्डों में सप्ताहभर तक सफाई नहीं होती। इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। बार-बार लापरवाही करने वाली कंपनी को नोटिस देकर कार्रवाई की जाए, ताकि शहर की सफाई व्यवस्था सुधर सके। भाजपा पार्षद बोले- बोलने तक का मौका नहीं दिया बैठक के बाद वार्ड 35 से भाजपा पार्षद और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अशोक चौधरी ने आरोप लगाया कि बैठक में भाजपा पार्षदों को अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि पूर्व सभापति और वर्तमान सभापति के पति जीवण खां के इशारे पर सभापति बैठक संचालित करती रहीं। यदि बोर्ड की बैठक इसी तरह चलानी थी तो भाजपा पार्षदों को बुलाया ही क्यों गया? चौधरी ने कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों पर भाजपा पार्षदों ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए सहमति दी, लेकिन समितियों के गठन में दलगत राजनीति सामने आ गई। आगामी बैठकों में भाजपा पार्षद पूरी तैयारी के साथ इन मुद्दों को उठाएंगे और सत्ता पक्ष को घेरेंगे।