शहर में एकमात्र खेल ग्राउंड इंदिरा गांधी स्टेडियम है, जो बदहाल है। इस समय खेलों के सीजन चल रहा है, जहां खिलाड़ी प्रेक्टिस कर राज्य स्तरीय, राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचते हैं, लेकिन खेल ग्राउंड की बदहाली से खिलाडी भी दुखी हैं। हर दिन प्रेक्टिस करने व मैच खेलने से पहले उन्हें ग्राउंड से फैली गंदगी व कचरा उठाकर फेंकना पड़ता है। चौकीदार व दीवार टूटी होने से आवारा मवेशियों का जमघट गंदगी को और बढ़ा रहा है। विडंबना यह है कि स्टेडियम नगर परिषद के अधीन है, लेकिन यहां न नियमित सफाई की व्यवस्था है और न ही सुरक्षा के लिए चौकीदार तैनात है। स्टेडियम की बदहाली को लेकर हर बार जिम्मेदार विभाग व अधिकारी बातें तो करते हैं, लेकिन ढाक के तीन पात वाली स्थिति है। सुबह और शाम अभ्यास के लिए पहुंचने वाले खिलाड़ियों को मैदान में फैला कचरा खुद उठाना पड़ता है। कई बार खिलाड़ी सफाई करने के बाद ही अभ्यास शुरू कर पाते हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि मैदान में खेल सुविधाएं विकसित करने के साथ उसकी साफ-सफाई और सुरक्षा की जिम्मेदारी को लेकर शायद ही कभी नगर परिषद ने सरोकार निभाया हो। खिलाड़ियों ने बताया कि मैदान में जगह-जगह कचरे के ढेर और गंदगी के कारण अभ्यास करने में परेशानी होती है। बारिश के बाद मैदान की स्थिति और खराब हो जाती है। कई बार आवारा पशुओं के मैदान में घुसने से चोटिल होने का खतरा भी बना रहता है। खिलाड़ियों ने नगर परिषद से नियमित सफाई, टूटी दीवार की मरम्मत, चौकीदार की नियुक्ति और खेल मैदान का रखरखाव कराने की मांग की है।