भास्कर न्यूज | बालोतरा पढ़ाई तो बहुत हो रही है, लेकिन विद्यार्थियों को जीवन जीने की कला नहीं सिखाई जा रही है। छोटी-छोटी असफलताओं के कारण विद्यार्थी आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं। ऐसे में जीवन में इमोशन को कैसे संभालना है, मुश्किल परिस्थितियों से कैसे निपटना है और संघर्ष करते हुए आगे कैसे बढ़ना है, यह सीखना भी जरूरी है। आचार्य महाप्रज्ञ का अवदान जीवन विज्ञान शिक्षा जगत के लिए महत्वपूर्ण है। प्राचीन काल में 72 व 64 कलाओं का उल्लेख मिलता है, इनमें एक कला जीवन विज्ञान भी है। यह विचार आचार्य महाश्रमण की सुशिष्या प्रो. डॉ. साध्वी मंगल प्रज्ञा ने तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम की ओर से आयोजित मेधावी सम्मान समारोह में व्यक्त किए। तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के निवर्तमान अध्यक्ष डॉ. रमेश भंसाली ने बताया कि सिवांची मालानी क्षेत्र के कक्षा 10वीं से लेकर प्रोफेशनल कोर्स तक में वरीयता प्राप्त व विशेष योग्यता हासिल करने वाले विद्यार्थियों को गोल्ड, सिल्वर व कांस्य पदक तथा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस सम्मान समारोह का पहला आयोजन युगप्रधान आचार्य महाश्रमण के सानिध्य में हुआ था। उसी श्रृंखला में दूसरा समारोह स्थानीय तेरापंथ भवन में आयोजित हुआ। टीपीएफ अध्यक्ष कुशल राज श्रीश्रीमाल ने कहा कि धर्मसंघ में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। इस दौरान पूर्व सभा अध्यक्ष महेंद्र वेद, मंत्री मोहन बाफना, तेयुप अध्यक्ष मुकेश चौपड़ा, मंत्री नवीन सालेचा, महिला मंडल अध्यक्ष चंचल भंडारी, टीपीएफ उपाध्यक्ष भंवरलाल सालेचा, विजय वडेरा व संदीप ओस्तवाल आदि मौजूद रहे। संचालन पवन बांठिया ने किया।