सुप्रीम कोर्ट ने कनाडा में सुसाइड करने वाली महिला के पति के खिलाफ दहेज हत्या, दहेज उत्पीड़न और मारपीट के आरोपों में दर्ज FIR रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि मौत से पहले पति या उसके परिवार के खिलाफ दहेज मांगने की कोई शिकायत नहीं हुई थी। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कहा कि शादी में दिया गया 15 तोला (150 ग्राम) सोना और दिवाली के गहने पारिवारिक गिफ्ट थे। महिला के भाई की ओर से पति के खाते में भेजे गए एक लाख रुपए भी दहेज का सबूत नहीं हैं। यह रकम भारत आने की फ्लाइट टिकट के लिए भेजी गई थी। महिला की शादी 2021 में हुई थी। 2022 में वह पति के साथ कनाडा के टोरंटो चली गई थी। 2023 में उसने एक अपार्टमेंट की 22वीं मंजिल से कूदकर सुसाइड कर लिया था। मौके से उसका सुसाइड नोट मिला था। महिला की मौत 11 जून 2023 को हुई। महिला के पिता ने दामाद पर उनकी बेटी को गालियां देने, बेवकूफ और बेकार कहने का आरोप लगाया था। पिता के आरोप और हाईकोर्ट का फैसला, 4 पॉइंट्स 1. इस मामले में कनाडा के कोरोनर की जांच और टोरंटो पुलिस की 2024 की क्लोजर रिपोर्ट में भी किसी साजिश या संघर्ष के संकेत नहीं मिले। जांच में सुसाइड नोट की लिखावट महिला की लिखावट से मेल खाई। CCTV फुटेज में घटना के समय पति घर पर मौजूद नहीं था। 2. इसके बाद महिला के पिता ने पति के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि शादी से पहले 15 तोला सोना मांगा गया था। शादी के बाद पहली दिवाली पर सोने की अंगूठी और कंगन, जबकि 2022 में तीन तोला सोना मांगा गया। 3. पिता के मुताबिक, पति उनकी बेटी को गालियां देता था और बेवकूफ व बेकार कहकर अपमानित करता था। इन आरोपों पर पति के खिलाफ दहेज हत्या, क्रूरता, मारपीट और अपमान से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज किया गया था। 4. बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने पति के माता-पिता और बहन के खिलाफ केस रद्द कर दिया था, लेकिन पति पर मुकदमा जारी रखने का आदेश दिया था। पति ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की इसके बाद पति ने 2025 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। उसने दलील दी कि आरोप सामान्य हैं और सुसाइड नोट में उसे मौत के लिए जिम्मेदार नहीं बताया गया है। उसने कनाडा की जांच रिपोर्ट का भी हवाला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दहेज की मांग, प्रताड़ना और सुसाइड के बीच कोई संबंध साबित नहीं हुआ। पत्नी को बेवकूफ और बेकार कहना अपने आप में क्रूरता का अपराध नहीं है। पति का गुस्सैल स्वभाव या अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल आपराधिक धमकी का मामला भी नहीं बनता। -------------------------------- यह खबर भी पढ़ें… ‘सहमति से बने संबंध ब्रेकअप के बाद रेप नहीं’, सुप्रीम कोर्ट बोला- हर टूटे रिश्ते को रेप केस में बदलना गलत; आरोपी बरी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वयस्क युवक-युवती के बीच आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंधों को ब्रेकअप के बाद रेप नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने शादी का वादा करके रिलेशन बनाने के आरोप वाले मामले में एक व्यक्ति को आरोपों से मुक्त कर दिया। पूरी खबर पढ़ें…