राजस्थान की महिला टी20 टीम का फ्लॉप शो जारी रहा। 5 में से 4 मैच हार गई हमारी सीनियर टीम। एक भी मैच में ऐसा परफॉर्मेंस नहीं दिखा जिसे याद रखा जा सका। सोमवार को बड़ौदा ने उसे 60 रन से पराजित कर दिया। पांच मैचों के टीम के प्रदर्शन पर नजर डाली तो सिर्फ और सिर्फ संगीता कुमावत ही कुछ अच्छा परफॉर्म करने में सफल रहीं। उन्होंने 2 अर्धशतक भी लगाए। ओपनिंग पार्टनरशिप में तो प्रयोग ही करते रहे सलेक्टर्स। लेकिन कोई भी ओपनिंग जोड़ी टीम को अच्छी शुरुआत नहीं दे सकी। राजस्थान की टीम की लगातार हार का सबसे बड़ा कारण यही रहा। इसके अलावा जो बेस्ट खिलाड़ी थीं वे तो स्टैंडबाय में अपनी बारी का इंतजार ही करती रहीं। इस तरह का बदतर प्रदर्शन राजस्थान की सीनियर महिला टीम का कभी भी नहीं रहा है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है : सलेक्टर्स, टीम मैनेजमेंट या प्रशासक। इससे पहले हमारी जूनियर टीम का भी प्रदर्शन काफी खराब रहा था। कोच, कप्तान, सलेक्टर्स, मैनेजर्स और कुछ खिलाड़ियों से अलग-अलग पूछताछ करके ये पता करना चाहिए कि क्या टीम में कोई गुटबाजी तो नहीं चल रही। क्या खिलाड़ियों पर किसी तरह का कोई प्रेशर तो नहीं बनाया जा रहा। यहां सवाल यह भी उठता है कि राकेश बत्तरा को कोचिंग से क्यों हटाया गया। टीम में 4 सीनियर खिलाड़ी ऐसी खेल रही थीं जो कि पहले कप्तान रह चुकी हैं। यही नहीं टीम की जो हेड कोच हैं वे भी इन खिलाड़ियों के साथ खेल चुकी हैं। इसलिए टीम में गुटबाजी की बात सामने आ रही है। राजस्थान की गेंदबाजों का प्रदर्शन जो बेस्ट वे स्टैंडबाय में ही इंतजार करती रहीं राजस्थान की टी20 की जो बेस्ट खिलाड़ी हैं वे स्टैंडबाय में ही अपनी बारी का इंतजार करती रहीं। इनमें आयुषि गर्ग, रिज़ा शेख, बबीता मीणा, आरजू, अक्षिता माहेश्वरी, अर्चना सैनी और अर्चना योगी शामिल हैं। क्या आगे होने वाले मैचों में सेलेक्टर्स इन रिजर्व खिलाड़ियों को मौका देंगी।