लंबे समय से प्रस्तावित झाड़ोल हाईवे को गोगुंदा हाईवे से जोड़ने का प्रोजेक्ट अब धरातल पर उतरता नजर आ रहा है। इस परियोजना के तहत सड़क चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण के लिए 14.6568 हेक्टेयर आरक्षित एवं संरक्षित वन भूमि के डायवर्जन प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। केंद्र के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, गांधीनगर ने 29 अक्टूबर को इस संबंध में आदेश जारी किया। मंजूरी के साथ 35 शर्तें लगाई गई हैं। इनकी पालना के बाद ही वन भूमि के उपयोग की स्वीकृति मिल सकेगी। यह प्रस्ताव गोगुंदा-मजावद-उदयपुर-धार-रामपुरा-सीसारमा-नया खेड़ा-नांदेश्वर मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण से संबंधित है। आदेश में मार्ग के किलोमीटर 0/0 से 39/0 तक के हिस्से का उल्लेख है। बता दें कि बलीचा से गोगुंदा की दूरी 50 किमी है। बलीचा से झाड़ोल हाईवे शुरू होता है। गोगुंदा से आने वाली सड़क सीसारमा में मिलेगी। नया रूट बनने से यह दूरी घटकर 30 से 35 किमी रह जाएगी। ऐसे में गोगुंदा जाने वालों की दूरी 15 से 20 किमी घट जाएगी। अहम शर्त...14.65 हेक्टेयर भूमि पर लगाने होंगे 14,650 पौधे गोगुंदा से यह सड़क झाड़ोल हाईवे (एनएच-58ई) तक जुड़ेगी। इससे अहमदाबाद हाईवे और झाड़ोल की ओर से आने वाले लोग सीधे गोगुंदा जा सकेंगे। इससे गोगुंदा, कुंभलगढ़, रणकपुर और सायरा सहित पिंडवाड़ा हाईवे पर जाने वाले हजारों लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। इसके साथ ही इस रूट पर स्थित पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा। अभी सड़क संकरी होने से यहां पर्यटकों की आवाजाही सीमित रहती है। निर्माण के दौरान वन्यजीवों की आवाजाही बाधित न हो, इसके लिए वन क्षेत्र में तीन कम ऊंचाई वाले पशु अंडरपास बनाने होंगे। परियोजना की क्रियान्वयन एजेंसी सार्वजनिक निर्माण विभाग, उदयपुर द्वितीय खंड है। मंत्रालय ने क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त समिति की 9 अक्टूबर को हुई बैठक में प्रस्ताव पर वन भूमि के डायवर्जन को सैद्धांतिक मंजूरी दी। 14.65 हेक्टे. में क्षतिपूरक वनीकरण वन भूमि के बदले जिले के बांदनवाड़ा गांव में 14.6568 हेक्टेयर गैर-वन भूमि पर क्षतिपूरक वनीकरण करना होगा। यह जमीन उदयपुर पूर्व वन रेंज और बड़गांव तहसील में चिह्नित की गई है। यहां 14,650 पौधे लगाए जाएंगे। वन क्षेत्र में मजदूर शिविर लगाने पर रोक, वन विभाग करेगा निगरानी केंद्र ने वन भूमि का उपयोग केवल स्वीकृत परियोजना के लिए करने की कड़ी शर्त रखी है। वन क्षेत्र में मजदूर शिविर स्थापित नहीं किए जा सकेंगे। पेड़ों की कटाई अपरिहार्य होने पर ही वन विभाग की निगरानी में होगी। वन भूमि की सीमा पर चार फीट ऊंचे सीमेंट-कंक्रीट के पिलर लगाने होंगे। निर्माण से निकलने वाला मलबा निर्धारित डंपिंग साइट पर ही डालना होगा। इसके अलावा ढलान पर मलबा गिरने से रोकने के लिए इंतजाम भी करने होंगे।