सीवरेज पानी अब शहर के लिए बोझ नहीं, बल्कि निगम की आय का बड़ा जरिया और एसेट बनने जा रहा है। निगम ने सुजानदेसर ट्रीटमेंट प्लांट के गंदे पानी को ट्रीट कर बेचने का टेंडर जारी कर वर्कऑर्डर भी दे दिया है। गुजरात की एक निजी फर्म 1.20 रुपए प्रति किलोलीटर की दर से यह पानी खरीदेगी। इस ट्रीटेड पानी से फर्म करीब 600 बीघा जमीन पर सुपर नेपियर घास उगाएगी, जिससे आगे चलकर एथेनॉल और मीथेन गैस का व्यावसायिक उत्पादन किया जाएगा। प्रारंभिक समझौते के तहत अभी सुजानदेसर प्लांट से 5 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) पानी दिया जाएगा। हालांकि प्लांट की कुल क्षमता 32 एमएलडी तक है। भविष्य में यदि फर्म पूरा 32 एमएलडी पानी लेती है तो नगर निगम को केवल सीवरेज पानी बेचकर ही हर साल करीब 1.40 करोड़ रुपए का राजस्व मिलेगा। यह प्रोजेक्ट यदि पूरी तरह सफल रहता है तो अगले 100 सालों तक संचालित होगा। ग्रीन एनर्जी और बायो-फ्यूल उत्पादन के नजरिए से यह बीकानेर का एक बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। 600 बीघा में उगने वाली सुपर नेपियर घास से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ बायो-सीएनजी (मीथेन) और टू-जी एथेनॉल का निर्माण होगा। गंदे पानी का ऐसा अनूठा कमर्शियल इस्तेमाल शहर के अपशिष्ट जल प्रबंधन का स्थायी समाधान बनेगा। ईंधन, सेनेटाइजर, वाइन, प्लास्टिक बनाने में होता है प्रयोग इथेनॉल के उपयोग मीथेन के उपयोग कितनी होगी गैस की पैदावार 600 हेक्टेयर भूमि पर वैज्ञानिक तरीके से सुपर नेपियर घास उगाने से सालाना लगभग 1.35 करोड़ से 2.31 करोड़ घन मीटर कच्ची बायोगैस या लगभग 12,750 से 19,950 टन शुद्ध बायो-सीएनजी का उत्पादन किया जा सकता है। व्यावसायिक और प्लांट के नजरिए से समझें तो इतने बड़े रकबे से रोजाना औसतन 40 से 45 टन (टीडीपी) बायो-सीएनजी पैदा हो सकती है। चरण 1: कुल घास (बायोमास) का उत्पादन ई-100 वाहनों का दौर शुरू हुआ तो बीकानेर बनेगा बड़ा फ्यूल उत्पादक जैसा कि केद्र सरकार ने घोषणा की है कि जल्द ही देश में ई-100 वाहन तैयार किए जाएंगे। ये वाहन सौ फीसदी एथेनॉल से ही चलेंगे। इसमें कितना वक्त लगेगा अभी कहना कठिन है मगर यह तय है कि इस दिशा में सरकार काम कर रही है। ऐसा हुआ तो भारत की ईकोनॉमी को बड़ा फायदा होगा। पेट्रोलियम पदार्थों पर निर्भरता घटेगी। पानी का वर्कऑर्डर जारी हो चुका है। 100 साल के लिए रीयूज़ ट्रीटेड वाटर पर काम होगा। इसके बाद सीवरेज पानी अब बोझ नहीं बल्कि निगम का एसेट बनेगा। आयुक्त महोदय के निर्देशानुसार ही इस पानी के बेचान की प्रक्रिया पूरी की गई है। -चिराग गोयल, एक्सईएन, नगर निगम