राजस्थान में दूसरे राज्यों के नंबर वाली निजी कारों से जबरन रोड टैक्स वसूली की परिवहन विभाग की कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। सीजे संजय के अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने यह फैसला हरपी कोर नेटवर्क इंडिया प्राइवेट लिमिटेड सहित संबंधित याचिकाओं पर सुनाया। कोर्ट ने कहा कि दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड निजी कारों से राजस्थान में रोड टैक्स वसूली के लिए अधिसूचना जरूरी है। इसके बिना न तो चालान बनेगा और ना ही टैक्स वसूला जा सकता है। हाईकोर्ट ने विवादित चालान और टैक्स मांग संबंधी पत्र निरस्त कर दिया। साथ ही, वसूली राशि 30 दिन में वाहन मालिकों को लौटाने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले से दूसरे राज्यों के उन वाहन मालिकों को भी राहत मिलेगी, जिनसे 30 दिन से अधिक रखने वाहन राजस्थान में रखने पर टैक्स मांगा गया था। 2024 की अधिसूचना से भी निजी कारों पर टैक्स वसूली अवैध है… परिवहन विभाग ने 10 जुलाई 2024 की अधिसूचना का हवाला देकर टैक्स वसूली को सही ठहराया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि यह अधिसूचना मालवाहक और यात्री वाहनों के लिए थी। इससे निजी कारों पर टैक्स का अधिकार नहीं मिल जाता। यानी विभाग किसी दूसरी श्रेणी के वाहनों के लिए जारी अधिसूचना के आधार पर निजी कारों से टैक्स नहीं वसूल सकता। भास्कर ने उठाया था मुद्दा वाहनों से अवैध वसूली क्यों? हाईकोर्ट ने राजस्थान की मेहमाननवाजी की परंपरा पधारो म्हारे देश का उल्लेख किया। दूसरे राज्यों के निजी वाहन मालिकों के सामने बिना आधार अवरोध खड़े नहीं किए जाने चाहिए। 3 सवालों में समझें कोर्ट का फैसला टैक्स वसूला पर रसीद जुर्माने की दी गई थी वसूली के रूप में आरटीओ अधिकारियों ने बड़ा खेल किया। इन्होंने दूसरे राज्यों की कारों का चालान कर दिया। टैक्स में जमा होने वाली राशि को जुर्माना में लिया गया। यह आरटीओ प्रथम में हुआ। करीब 40 से अधिक कारों की टैक्स की राशि जुर्माने के रूप में वसूली गई। रसीद भी जुर्माने की दी गई ताकि राशि टैक्स में साबित नहीं हो सकें। अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद अन्य राज्यों के वाहनों को राजस्थान में राहत मिलेगी, साथ ही जिनसे वसूली हुई है, उनके पैसे वापस मिल सकेंगे। 1. वसूली किस आधार पर हुई?
जब निजी कारों पर टैक्स लगाने के लिए जरूरी अधिसूचना ही जारी नहीं हुई थी, तो विभाग ने किस कानूनी प्रावधान के तहत चालान बनाए और लाखों रुपए की टैक्स वसूली की ? कार सीज के बाद जो वाहन मालिक टैक्स जमा नहीं करा पाए, उनकी करोड़ों की कार आरटीओ ऑफिस में कबाड़ हो गई, अब इसकी जिम्मेदारी किसकी है ? क्या सीज करने वाले अधिकारियों से कबाड़ हुई कारों की कीमत वसूली होगी ? 2. कितने वाहनों से वसूली हुई?
अब तक दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड करीब 800 से अधिक कारों से से 10 करोड़ से अधिक का टैक्स वसूला जा चुका है। इसके अलावा जयपुर प्रथम और द्वितीय आरटीओ कार्यालय में सीज हुई करीब 150 से अधिक कारें कबाड़ हो रही है। इन दोनों आरटीओ में सबसे ज्यादा दूसरे राज्यों की कारों पर कार्रवाई की गई। 3. पुराने मामलों में मिलेगी राहत?
दूसरे राज्यों की निजी कारों से परिवहन विभाग ने 1 लाख से 3 लाख तक की वसूली की। इतनी राशि वन टाइम टैक्स होती है, जुर्माने के रूप में नहीं। यदि वाहन मालिक कार का राजस्थान में पंजीयन कराते हैं तो वसूली गई राशि वन टाइम टैक्स में समायोजित नहीं होगी।