प्रदेश के नगरीय निकायों की स्वच्छता रैंकिंग को झटका लग सकता है। सरकार ने 3 साल से स्वच्छ सर्वेक्षण की तकनीकी तैयारी संभाल रहे 243 एमआईएस इंजीनियरों को सर्वे शुरू होने से 15 दिन पहले हटा दिया है। अनुबंध 31 अक्टूबर को खत्म हो गया और कंपनी ने लास्ट वर्किंग-डे का पत्र भी जारी कर दिया। इसके बाद से निगम गलियारों में इसकी चर्चा है। दरअसल, इन इंजीनियरों के आने से जयपुर सहित प्रदेश के कई निगमों की रैंकिंग में बड़ा सुधार हुआ। 2023 में हेरिटेज निगम 171वें और ग्रेटर 173वें स्थान पर थे। 2024-25 में ग्रेटर 16वें और हेरिटेज 20वें स्थान पर पहुंच गए। दोनों को 3-स्टार रेटिंग भी मिली। उदयपुर सहित प्रदेश के तीन निकाय देश के टॉप-20 और 12 शहर टॉप-100 में आए। ओडीएफ शहरों की संख्या 17 से बढ़कर 38 हो गई। नई एजेंसी के लिए 3 करोड़ डीएलबी ने 24 फरवरी 2026 को स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के लिए नगरीय निकायों में तकनीकी सहायता और प्रदर्शन आकलन के लिए एजेंसी नियुक्त करने की निविदा निकाली थी। इसकी अनुमानित लागत 3 करोड़ रुपए थी। उपलब्ध निविदा परिणाम के अनुसार क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की 2.99 करोड़ रुपए की वित्तीय बोली स्वीकार की गई। सिर्फ डेटा एंट्री नहीं, सर्वेक्षण की पूरी डिजिटल तैयारी संभालते थे पीआईयू पर भी करीब 1 करोड़ सालाना खर्च जयपुर सहित निगमों में मार्च 2024 से PIU टीमें भी काम कर रही हैं। प्रत्येक निगम में ‌~1 करोड़ सालाना खर्च हो रहा है। अब अलग तकनीकी एजेंसी नियुक्त की जा रही है। ऐसे में यह भी सवाल है कि पीआईयू और नई एजेंसी की जिम्मेदारियां क्या अलग होंगी और दोनों पर अलग-अलग खर्च की जरूरत क्यों पड़ी? स्वच्छता सर्वेक्षण से पहले अगर MIS इंजीनियरों को हटाया गया है तो इस संबंध में मंत्री तक बात रखी जाएगी। जयपुर में स्वच्छता को अभियान बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। -सुनील कोठारी, मेयर, जयपुर