जिले की दीगोद तहसील के पचारा के झोपड़ियां क्षेत्र की अधिकांश खदानों में बारिश के बाद से पानी भरा हुआ है। इनमें खनन संभव नहीं है, लेकिन खनिज विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार यहां से रोज चुनाई पत्थर निकाला जा रहा है। रिकॉर्ड बताता है कि यहां 1 से 25 अक्टूबर तक पत्थर ले जाने के लिए दो हजार से अधिक ई-रवन्ना जारी हुए हैं और इनसे करीब 6 हजार टन पत्थर निकालकर मार्केट में बेच दिया गया। दैनिक भास्कर टीम ने इस पूरे खनन एरिया को देखा और समझा। भास्कर पड़ताल में सामने आया है कि ई-रवन्ना पानी से भरी खदानों का काट रहे हैं और इनकी आड़ में सरकारी और वन विभाग की जमीन पर अवैध खनन करके पत्थर निकाला जा रहा है। ई-रवन्ना के जरिए अवैध खनन को वैध करके पत्थर बेचा जा रहा है। भास्कर टीम के पास पुख्ता सबूत हैं कि अवैध खनन से निकाले गए पत्थर को मार्केट में बेचा जा रहा है। भास्कर ने खुद वहां से एक-एक डंपर और ट्रैक्टर से भरे पत्थरों का सौदा किया, ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके। माइंस एरिया से निकल रहे ट्रक और ट्रैक्टर के नंबर से चेक करने पर इनके नाम से रवन्ना जारी होना पाया गया, जबकि जिन खदानों के नाम रवन्ना में बताए गए हैं, उनमें पानी भरा हुआ है। यह पूरा खेल साबित करता है कि यहां बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है। एक खान से 93, दूसरी से 68 और तीसरी से 82 ई-रवन्ना जारी; अफसर बोले-आप सूचना दें, कार्रवाई होगी आनंद सिंह : 93 रवन्ना : आनंद सिंह के नाम की लीज में पानी भरा हुआ है। खनन असंभव, इसके बावजूद 1 से 25 अक्टूबर तक 93 ई-रवन्ना काटकर अवैध खनन करके पत्थर को बाजार में बेचा गया। नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं हो सकता है। अगर ऐसा हो रहा है तो वह गलत हो रहा है। आप मुझे इसकी जानकारी दीजिए, मैं अभी माइनिंग की टीम को मौके पर भेजकर जांच करवाता हूं। -रामनिवास मंगल, एमई, कोटा पलायथा एसोसिएट : 68 रवन्ना​ : पलायथा एसोसिएट लीज में तीन महीने से पानी भरा हुआ है। इसके बावजूद 1 से 25 अक्टूबर की सुबह 9 बजे तक 68 रवन्ना काटे गए हैं, जबकि लीज में पूरी तरह पानी भरा हुआ है। हारुन रसीद : 82 रवन्ना जारी : पूरा पानी भरा है। इसके बाद भी 4 से 25 अक्टूबर सुबह 9:20 बजे तक पत्थर से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली के 82 रवन्ना काटकर बाजार में भेज दिया गया।