कांग्रेस की दिल्ली रैली के बाद अब ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं की धड़कनें तेज हो गई हैं, जिनकी परफॉर्मेंस टारगेट के लिहाज से कमजोर या एकदम निचले दर्जे की रही है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश नेतृत्व ने तय किया था कि यह रैली पार्टी कार्यकर्ताओं-नेताओं की परीक्षा होगी, जिसका परिणाम उनकी संगठन में जिम्मेदारी के रूप में दिखाई देगा। कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव ने दिल्ली कूच के लिए टारगेट दिया था। उस टारगेट का कन्वर्जन ही परीक्षा के अंक तय करेगा। असल में टारगेट तय करते समय प्रदेश वॉर रूम को जिम्मेदारी दी गई थी कि वह गणना सुनिश्चित करेगा कि टारगेट के अनुसार कितने लोग रैली में पहुंचे। रैली में पहुंच नहीं पाए तो कारण क्या रहे? कहीं रोका गया तो उसके सबूत के रूप में वे वीडियो-फोटो आदि किस प्रकार के दे रहे हैं? इन्हीं सबूतों के आधार पर पदाधिकारियों के अंक तय किए जाएंगे और वही गणना संगठन में दी जाने वाली जिम्मेदारी की अहमियत तय करेगी। आगे क्या.. चुनाव बाद बड़े बदलाव प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को संगठन के प्रदेश पदाधिकारियों को कार्यशैली और सक्रियता के आधार पर चीजें तय करने को आलाकमान ने कहा है। उसी अनुरूप अब पंचायत चुनाव के बाद प्रदेश व जिला संगठन में बड़े बदलाव होंगे। हालांकि डोटासरा ने पूर्व में भी कांग्रेस आलाकमान के पास एक सूची भेजी थी, लेकिन फिलहाल उस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। राष्ट्रीय सचिव के इंटरव्यू रद्द किए राहुल ने दिल्ली रैली से पूर्व लोकसभा में राहुल गांधी ने राष्ट्रीय सचिव के लिए इंटरव्यू किए थे। इंटरव्यू में शामिल राजस्थान के 4 से 5 नेताओं से राहुल गांधी ने विस्तृत बात की थी। सही व्यक्ति नहीं मिलने पर इंटरव्यू रद्द कर दिए।