राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ (डेयरी) से 250 कट्टा मिल्क पाउडर गबन और उसे अवैध रूप से अहमदाबाद में बेचने के मामले में आरोपियों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति फरजंद अली की एकल पीठ ने डेयरी चेयरमैन डालचंद डांगी, ट्रांसपोर्टर अशोक सिंह, लक्ष्मण सिंह के अलावा विवेक सिंह और कन्हैया लाल द्वारा एफआईआर निरस्त करने के लिए दायर अलग-अलग याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत ने इसे संगठित कालाबाजारी और सहकारी संस्था के साथ विश्वासघात करार दिया। कोर्ट ने कहा कि आर्थिक अपराधों की जांच को शुरुआती स्तर पर रोकना उचित नहीं है। हालांकि, पूर्व एमडी विपिन शर्मा के खिलाफ अपराध सिद्ध नहीं होने पर कोर्ट ने उन्हें राहत दी है। एसपी के समक्ष बेगुनाही साबित करने का मौका याचिकाएं खारिज करने के साथ ही कोर्ट ने आरोपियों को उदयपुर एसपी के समक्ष बेगुनाही के सबूत पेश करने का मौका दिया है। इस दौरान उनकी गिरफ्तारी पर 30 दिन की रोक लगाई गई है, लेकिन पुलिस को पारदर्शिता के साथ जांच जारी रखने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि गत वर्ष 23 जुलाई में डेयरी के गोदाम से 6,250 किलो मिल्क पाउडर (कीमत 25 लाख रुपए) खुर्द-बुर्द कर अहमदाबाद की एक पार्टी को बेचा गया था। मामले में 1 अक्टूबर 2025 में गोवर्धन विलास थाने में धारा 316(4) और 61(2) के तहत केस दर्ज किया गया। कोर्ट में परिवादी की ओर से अधिवक्ता हार्दिक व्यास ने पैरवी की। शिकायतकर्ता भैरू लाल पटेल का आरोप है कि यह एक बड़ा घोटाला है, जिसमें 36 लाख के 403 घी के डिब्बे भी गायब हैं।