राजकीय मेडिकल कॉलेज झालावाड़ के सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने एक जटिल ऑपरेशन कर 23 वर्षीय युवती को बड़ी राहत दी है। युवती की तिल्ली (प्लीहा) असामान्य रूप से बढ़कर 24 सेंटीमीटर आकार की हो गई थी और उसका वजन करीब 3 किलोग्राम हो गया था। इस कारण युवती को बार-बार रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ रही थी। सर्जरी विभाग के प्रोफेसर एवं सीनियर सर्जन डॉ. हुकमचंद मीणा के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने जटिल स्प्लेनेक्टॉमी सर्जरी कर शरीर से इतनी विशाल तिल्ली को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। इस ऑपरेशन के बाद युवती को बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता से राहत मिलने की उम्मीद है। चिकित्सकीय जांच और मूल्यांकन के बाद विशेषज्ञों ने तिल्ली निकालने का निर्णय लिया। सर्जरी से पहले और बाद में मरीज को कुल तीन यूनिट रक्त चढ़ाया गया। चिकित्सकों ने ऑपरेशन के साथ ही मरीज की भविष्य की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया। तिल्ली निकलने के बाद कुछ गंभीर बैक्टीरियल संक्रमणों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में संक्रमण से बचाव के लिए प्री और पोस्ट ऑपरेटिव देखभाल के तहत आवश्यक वैक्सीनेशन भी किया गया। तिल्ली मानव शरीर के पेट के ऊपरी बाएं हिस्से में, पसलियों के नीचे और पेट के ठीक पीछे स्थित एक छोटा, मुलायम और स्पंज जैसा अंग है। इसका आकार लगभग किसी व्यक्ति की मुट्ठी के बराबर होता है। यह (प्लीहा) शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली और रक्त कोशिकाओं के नियमन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कुछ रक्त संबंधी बीमारियों, तिल्ली के अत्यधिक बढ़ने और चुनिंदा अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों में तिल्ली यानी स्प्लीन को निकालने की आवश्यकता हो सकती है। इसे ही स्प्लेनेक्टॉमी सर्जरी कहा जाता है। हुकमचंद मीणा, सीनियर सर्जन टीम के समन्वय से मिली सफलता राजकीय मेडिकल कॉलेज में 23 वर्षीय युवती की जटिल स्प्लेनेक्टॉमी सर्जरी डॉ. हुकमचंद मीणा के नेतृत्व में सफलतापूर्वक की गई। ऑपरेशन में सर्जरी विभाग से डॉ. यमुना प्रसाद मीना, डॉ. शकील, डॉ. विशाल, डॉ. नवीन मेहरा और डॉ. अरिजीत गुप्ता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. विकास और डॉ. उपेंद्र ने मरीज की एनेस्थीसिया संबंधी जिम्मेदारी संभाली। सर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग के बेहतर समन्वय, विशेषज्ञता और समर्पण से यह जटिल ऑपरेशन सफल हो सका। तिल्ली निकलने के बाद क्यों जरूरी है वैक्सीनेशन? तिल्ली शरीर में खून को छानने, पुरानी लाल रक्त कोशिकाओं को हटाने और संक्रमण से लड़ने में अहम भूमिका निभाती है। इसे निकालने के बाद न्यूमोकोकल, मेनिंगोकोकल और एचआईबी जैसे गंभीर बैक्टीरियल संक्रमणों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए मरीज को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार इन संक्रमणों से बचाव के लिए टीके लगाए जाते हैं। इसके अलावा वार्षिक इन्फ्लुएंजा वैक्सीन और अन्य जरूरी टीकों की भी सलाह दी जाती है। तिल्ली निकलने के बाद वैक्सीनेशन मरीज की दीर्घकालीन सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।