डमी अभ्यर्थी बनकर परीक्षा देने वाले निलंबित आरएएस हनुमानराम की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। बुधवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच में सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर राहत नहीं दी जा सकती। जमानत याचिका की सुनवाई में राज्य सरकार ने कहा कि ऐसा व्यक्ति प्रशासनिक सेवा में बना रहता तो राज्य व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकता था। सरकार ने दलील दी कि आरोपी का कृत्य लोक प्रशासन की नींव पर और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सीधा हमला है। इसलिए जमानत का लाभ नहीं मिलना चाहिए। कोर्ट ने सरकार के तर्कों से सहमति जताई। कोर्ट ने कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। 3 अलग-अलग व्यक्तियों के लिए डमी अभ्यर्थी बनकर परीक्षा देने का आरोप है। यह एकल घटना नहीं है। यह उसके निरंतर आचरण को दिखाता है। कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर राहत नहीं दी जा सकती है। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल एसडी संजय और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने कोर्ट को बताया कि हनुमानाराम ने एसआई भर्ती-2021 के विभिन्न चरणों में डमी कैंडिडेट के रूप में हिस्सा लिया था। इसके अलावा पटवारी भर्ती परीक्षा-2021 में भी डमी कैंडिडेट बनकर शामिल हुआ था। फतेहगढ़ एसडीएम रहते हुई थी गिरफ्तारी, एसआई भर्ती परीक्षा में डमी कैंडिडेट बना था बाड़मेर के बिसारणिया निवासी हनुमानाराम विरड़ा को एसओजी ने 9 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया था। हनुमानराम पढ़ाई में काफी होशियार था। उसने आरएएस परीक्षा-2021 में 22वीं रैंक हासिल की थी। हनुमान की पहली नौकरी चितलवाना एसडीएम के तौर पर लगी थी। नौकरी में रहते उसने डमी कैंडिडेट बनकर परीक्षाएं दी थीं। चितलवाना एसडीएम रहते हनुमान ने जालोर के वाडानया, बागोड़ा निवासी नरपत लाल की जगह एसआई भर्ती-2021 की परीक्षा दी थी। 6 अप्रैल 2025 को एसओजी ने नरपतलाल को गोवा से गिरफ्तार किया था। इसी दिन नरपत की पत्नी इंद्रा को भी जोधपुर से गिरफ्तार किया था। दोनों से पूछताछ में सामने आया कि हनुमान राम ने नरपत की जगह परीक्षा दी थी। इस पर एसओजी ने 9 अप्रैल 2025 को हनुमान राम को गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान हनुमान जैसलमेर के फतेहगढ़ में एसडीएम लगा हुआ था। गिरफ्तारी के बाद 23 अप्रैल को उसे सस्पेंड कर दिया था।