सोचिए जरा! जयपुर की आबादी 70 लाख के करीब है और पब्लिक टॉयलेट्स की संख्या सिर्फ- 248... यानी करीब 29 हजार लोगों पर एक टॉयलेट। 31 लाख से ज्यादा महिलाओं को डेडिकेटेड 50 टॉयलेट भी नहीं हैं। इसी पीड़ा को समझने के लिए भास्कर जौहरी बाजार, किशनपोल और चांदपोल में पोर्टेबल टॉयलेट्स ले गया। 7 घंटे में ही 570 महिलाएं टॉयलेट यूज करने आईं। महिलाओं ने कहा- टॉयलेट सबसे जरूरी है और यही नहीं हैं। आप इन्हें हटाना मत! परकोटे के बाजारों में तो टॉयलेट ढूंढे नहीं मिलते। जो मिल भी जाएं तो इतने गंदे हैं कि महिलाएं उन्हें इस्तेमाल करने से बचती हैं। महिलाएं घंटों यूरिन रोके रहती हैं। पानी तक पीने से बचती हैं। भास्कर की महिला रिपोर्टर्स बॉर्डर सिक्योरिटी सर्विसेज के नीरज अदलखा के सहयोग से जौहरी बाजार, किशनपोल और चांदपोल में ‘कैबिन टॉयलेट’ ले गईं। 7 घंटे में जो तस्वीरें और कहानियां सामने आईं, वे स्मार्ट सिटी और स्वच्छ भारत अभियान के दावों की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी थीं। जौहरी बाजार में बेंगलुरु से आई स्वर्णा सीतारमन घी वालों के रास्ते के वॉशरूम में गई थीं, जो गीला व गंदा था तो वह सामने होटल में फ्रेश होने गईं। बुजुर्ग बोलीं- अगली बार हम एडल्ट डायपर साथ लेकर आएंगे। भास्कर सैनिटेशन ऑडिट; पब्लिक टॉयलेट कम और गंदे, 3 में से 2 पर ताला भास्कर ने पोर्टेबल टॉयलेट पर आने वाली करीब 570 महिलाओं से सवाल पूछा - आप जब बाजार आती हैं तो दिन में कितने घंटे यूरिन रोकती हैं? 68% महिलाओं का जवाब- 4 घंटे तक पानी नहीं पीतीं, यूरिन रोकती हैं। यूरिन रोकने, पानी न पीने से किडनी स्टोन और यूटीआई हो सकते हैं। पीरियड्स में रिस्क ज्यादा। बुजुर्ग, प्रेग्नेंट, डायबिटिक या किडनी के पेशेंट को दिक्कतें हो सकती हैं। - डॉ. अर्चना शुक्ला, स्त्री रोग विशेषज्ञ खुले यूरिनल्स पर छत, कर्टेन वॉल 20 हजार में बन जाए। हर 300 मी. पर दो टॉयलेट्स युक्त सुविधा 75 हजार में बन जाए। - मनोज कुमार शर्मा, रिटायर्ड एक्सईएन