राजस्थान विधानसभा में विभागों की ऑडिट व्यवस्था और तकनीकी स्टाफ की कमी का मुद्दा उठाते हुए जूली ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विभागों की खुद की ऑडिट में भारी भ्रष्टाचार सामने आ रहा है। जूली ने सवाल उठाया कि जब ऑडिट करने वाली टीम की कार्यप्रणाली पर ही सवाल हैं, तो उसकी भी ऑडिट होनी चाहिए। जूली मंगलवार को केरल के त्रिवेंद्रम में आयोजित संसद और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की जन लेखा समितियों के अध्यक्षों के दो दिवसीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। जूली ने राजस्थान विधानसभा में टेक्निकल स्टाफ की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राजस्थान विधानसभा में टेक्निकल स्टाफ की कमी है। टेक्निकल स्टाफ अकाउंट्स की बात को पूरा समझता है। सीएजी वाले अपने हिसाब से बताते हैं, लेकिन सीएजी के बताने के बाद भी बहुत सी बातें ऐसी हैं, जो सीएजी ऑडिट के अंदर भी नहीं आतीं। विभाग खुद की ऑडिट करते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा जरूरत उनकी ऑडिट कराने की है। उसमें भारी भ्रष्टाचार और करप्शन है। कोरे साइन करके रख लिए जाते हैं और सेटिंग करके ऑडिट को ओके कर दिया जाता है। उन्होंने जन लेखा समिति (पीएसी) की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकारी खर्च की गुणवत्ता और उससे मिलने वाले परिणामों का मूल्यांकन करने पर जोर दिया। उन्होंने समिति की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाने के लिए कई सुझाव भी रखे। एक महीने में कम से कम 4 विभागों की जांच हो जूली ने कहा कि जन लेखा समिति की बैठकें पूरे साल नियमित अंतराल पर होनी चाहिए। एक महीने में कम से कम 4 विभागों का परीक्षण किया जाए, ताकि कैग की रिपोर्टों में लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण हो सके। इससे विभागों की जवाबदेही तय करने और वित्तीय अनुशासन मजबूत करने में मदद मिलेगी। पीपीपी मॉडल के खर्च भी जांच के दायरे में आएं उन्होंने सुझाव दिया कि पीपीपी मॉडल, स्वायत्तशासी संस्थाओं और स्पेशल पर्पज व्हीकल के माध्यम से होने वाले बड़े खर्च को भी जन लेखा समिति की नियमित जांच के दायरे में शामिल किया जाए। सार्वजनिक धन से जुड़े सभी प्रमुख खर्चों की समीक्षा होनी चाहिए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। विभागों के अधूरे जवाब पर दोबारा मांगी जाए जानकारी जूली ने विभागों की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई विभाग समिति के सवालों का पूरा जवाब नहीं देता है तो उसे अपूर्ण मानकर दोबारा जवाब मांगा जाना चाहिए। निर्धारित समय में जानकारी नहीं देने वाले विभागों के खिलाफ कार्रवाई की व्यवस्था भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समिति की सिफारिशों पर विभागों से मिलने वाली एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) में की गई कार्रवाई, लंबित काम और उसे पूरा करने की समय-सीमा स्पष्ट होनी चाहिए। केवल रिपोर्ट प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस पर हुई वास्तविक कार्रवाई की समीक्षा भी जरूरी है। नियमों में बदलाव से अनियमितताओं की पुनरावृत्ति रोकने पर जोर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि किसी वित्तीय अनियमितता की वजह नियमों की अस्पष्टता या प्रक्रिया में कमी है तो समिति को संबंधित अधिकारी से जवाब मांगने के साथ नियमों में संशोधन की अनुशंसा भी करनी चाहिए। वित्त विभाग से यह भी सुनिश्चित कराया जाए कि सुझाए गए बदलाव अधिसूचित हुए हैं या नहीं। इससे एक विभाग में सामने आई अनियमितता की पुनरावृत्ति दूसरे विभागों में रोकने में मदद मिलेगी।