टैक्स वसूलने में नाकाम परिवहन विभाग अब उपभोक्ताओं पर भार डाल रहा है। BH (भारत) सीरीज के तहत हुए पुराने वाहनों की किस्तें नहीं जमा हुईं तो परिवहन विभाग ने 6 साल में 3 किस्तों में वसूल किए जाने वाले रजिस्ट्रेशन शुल्क को एक किस्त में वसूलने के निर्देश दिए हैं। यह व्यवस्था जयपुर आरटीओ (प्रथम) के यहां लागू कर दी गई है। अफसरों का कहना है कि किस्तें जमा नहीं होने से विभाग को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब सवाल है कि विभाग की गलती से वसूली नहीं हो पा रही है, तो आम आदमी की क्या गलती है? वाहन खरीदने के बाद BH सीरीज में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया संबंधित डीलर अपने स्तर पर पूरी करता है। ऐसे में डीलर के माध्यम से रजिस्ट्रेशन कराने वाले नए खरीदारों को शुरुआत में छह साल का टैक्स एकमुश्त जमा कराना पड़ रहा है। इससे वाहन खरीदने वालों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। विभाग की ओर से इस व्यवस्था के पीछे BH सीरीज में पहले से पंजीकृत वाहनों का पूरा टैक्स नहीं मिलना वजह बताया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि जिन पुराने वाहन मालिकों से विभाग टैक्स वसूल नहीं कर पा रहा है, उनकी जिम्मेदारी अब नए वाहन खरीदने वालों पर क्यों डाली जा रही है? हर दो साल में टैक्स देने का नियम केंद्र सरकार ने BH सीरीज की शुरुआत 15 सितंबर 2021 को की थी। इसका उद्देश्य था कि ऐसे कर्मचारियों को सुविधा देना था, जिनका नौकरी के सिलसिले में अलग-अलग राज्यों में तबादला होता है। इस सीरीज में वाहन मालिक को एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होती। BH सीरीज के वाहनों का मोटर वाहन कर सामान्य नंबर प्लेट की तरह एकमुश्त 15 साल के लिए जमा नहीं होता, बल्कि दो साल के अंतराल पर जमा कराया जाता है। वाहन मालिक रजिस्ट्रेशन कराकर समय पर किश्त जमा नहीं करा रहे हैं। ऐसे में टैक्स वसूली एक साथ की जा रही है। इससे राजस्व भी बढ़ा है। -रमेश पाण्डेय, डीटीओ