उदयपुर में भाजपा नेता और राजस्थान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस कांग्रेस ने आजादी के बाद सबसे ज्यादा संविधान को कुचला और 93 बार सरकारें गिराईं, वहीं आज लोकतंत्र को खतरे में बता रही है। कांग्रेस आज मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) पर झूठा माहौल बनाकर अराजकता फैला रही है। उन्होंने कांग्रेस के 'लोकतंत्र बचाओ' दावे की धज्जियां उड़ाते हुए कहा, “सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली।” चतुर्वेदी ने कहा कि तीन बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत सिर्फ मीडिया में बयानबाजी करने के बजाय अगर वाकई गंभीर हैं, तो अपने आरोपों को सही कानूनी मंच पर रखकर अंजाम तक पहुंचाएं। वहीं चतुर्वेदी ने नसीरुद्दीन शाह पर भी टिप्पणी की और कहा कि सीने पर 'दिमागी नक्सल' का बैज लगाने वाले अभिनेता नसीरुद्दीन शाह यह तय करें कि उन्हें भारत और यहां के संविधान से प्रेम है या नहीं और अगर नहीं है तो वे अपना रास्ता खुद तय कर लें। उदयपुर में भाजपा कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए शनिवार को अरूण चतुर्वेदी ने यह बात कही। इंदिरा ने कुर्सी बचाने के लिए बदला संविधान चतुर्वेदी ने कहा कि आजादी के बाद जिस पार्टी ने सबसे ज्यादा देश के संविधान को तोड़ा और लोकतंत्र का मान-मर्दन किया, वही आज लोकतंत्र खतरे में बताकर देश में अशांति पैदा करने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में अलग-अलग समय पर करीब 93 बार धारा 356 का दुरुपयोग कर राज्यों की चुनी हुई सरकारों को बर्खास्त किया। चतुर्वेदी ने आपातकाल की याद दिलाते हुए कहा कि जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ फैसला सुनाया, तो उन्होंने प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बजाय रातों-रात देश का संविधान ही बदल डाला। देश पर काला कानून लाकर आपातकाल थोपा गया। देश के सभी प्रमुख विपक्षी नेताओं को जेलों में ठूंसा गया और मीडिया पर सेंसरशिप (तालाबंदी) लगा दी गई। बार-बार सत्ता को अपनी मर्जी से चलाने वाली वही कांग्रेस आज देश की संवैधानिक संस्थाओं, कभी ईवीएम (EVM) तो कभी चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है। 10 बार कांग्रेस के राज में हुआ SIR देश में चल रहे वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण अभियान यानी एसआईआर (SIR) पर कांग्रेस के विरोध को चतुर्वेदी ने पूरी तरह खोखला बताया। उन्होंने आंकड़े रखते हुए कहा कि हर चुनाव से पहले वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण होता है और आजादी के बाद देश में यह 12वीं बार हो रहा है। इससे पहले 10 बार खुद कांग्रेस की सरकारों के समय यह हुआ, एक बार अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में और अब 12वीं बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कराया जा रहा है। चतुर्वेदी ने तंज कसते हुए कहा कि 13 लाख करोड़ के फर्जी आरोप लगाने वाली कांग्रेस पार्टी के पास हर बूथ पर बीएलए-1 (बूथ लेवल एजेंट) तैनात हैं, लेकिन इसके बावजूद वे पूरे अभियान में 1300 लोगों की तरफ से भी आधिकारिक आपत्ति दर्ज नहीं करवा पाए हैं। कांग्रेस के इन्हीं कृत्यों को जनता के सामने लाने के लिए भाजपा ने 22 अक्टूबर से 5 नवंबर तक 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान शुरू किया है, जिसके तहत पार्टी नेता आमजन के बीच जाकर सच्चाई रख रहे हैं। गहलोत तीन बार सीएम रहे, कानून जानते हैं तो सिर्फ कोरे बयान न दें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयानों पर पलटवार करते हुए अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि गहलोत एक बार नहीं, बल्कि तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वे देश और प्रदेश के कानून और व्यवस्थाओं को बहुत अच्छी तरह जानते हैं। ऐसे में सिर्फ हवा में आरोप लगाने के बजाय अगर वे अपने बयानों को लेकर वास्तव में गंभीर (सिंसियर) हैं, तो उन विषयों को उचित कानूनी जगह पर पहुंचाएं और मामले को अंजाम तक पहुंचाने का काम करें। विदेशी ताकतों के इशारे पर देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं 'दिमागी नक्सल' हाल ही में अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर खुद को गर्व से 'दिमागी नक्सल' बताया था। उन्होंने 'दिमागी नक्सल' लिखा बैज लगाकर केंद्र सरकार पर युवाओं की हिम्मत तोड़ने, शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने और लोकतंत्र को खतरे में डालने के आरोप लगाए थे। इस बयान पर कड़ा प्रहार करते हुए अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि देश में वामपंथ अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है, लेकिन कुछ लोग आज भी खुद को अर्बन नक्सलवादी कहलवाते हैं। ये वे लोग हैं जो बुद्धि का ठेका लेकर देश को अपने हिसाब से चलाने की बात करते हैं। इन्हें भारत के कानून से मतलब नहीं है, बल्कि ये दुनिया के दूसरे देशों से प्रेरित होकर भारत को अराजकता में धकेलने का प्रयास करते रहते हैं। उन्होंने सीधा सवाल उठाते हुए कहा कि नसीरुद्दीन शाह को इस देश ने पूरा मान और सम्मान दिया, लेकिन जब भी असहिष्णुता की बात आती है या अर्बन दिमागी नक्सल की बात आती है, तो वे सबसे आगे खड़े हो जाते हैं। अब वे स्वयं तय करें कि उन्हें भारत और भारत के संविधान से प्रेम है या नहीं। अगर नहीं है, तो वे अपना रास्ता स्वयं तय करने का काम करें। पार्टी कार्यालय में ये जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी रहे मौजूद इस दौरान उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन, उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, महापौर पारस सिंघवी, भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ और भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक प्रमोद सामर भी मौजूद रहे।