शहर भाजपा में उदयपुर फाइल्स (भाजपा नेत्री संग नेताओं के आपत्तिजनक वीडियो कांड) के बीच पिछले 20 दिनों से आरोप-प्रत्यारोपों की राजनीति चल रही है। इसकी शुरुआत मावली के पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी के समर्थक पूर्व भाजपा पार्षद डॉ. विजय प्रकाश विप्लवी द्वारा 27 मार्च को पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के खिलाफ राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को पत्र भेजने से हुई। इसको हवा खुद राज्यपाल कटारिया ने 7 अप्रैल को उदयपुर दौरे के दौरान यह कहकर दे दी कि वे (धर्मनारायण जोशी) मैदान (मावली विधानसभा) छोड़कर क्यों चले गए, चुनाव लड़ते, किसने रोका था? इसके बाद 10 अप्रैल को जोशी ने कटारिया को पत्र भेजकर आरोपों-प्रत्यारोपों की झड़ी लगा दी। अब पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष मांगीलाल जोशी ने 13 अप्रैल को सोशल मीडिया पर पत्र लिखकर जोशी व राज्यपाल कटारिया के खिलाफ आरोपों की सियासी बौछार कर दी। शहर भाजपा में अचानक बढ़ रहे इस विवाद पर प्रदेश नेतृत्व ने कार्रवाई करना तो दूर एक बयान तक जारी नहीं किया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह भाजपा नेता सोची-समझी सियासी रणनीति के तहत आपसी पुराने आरोप-प्रत्यारों को सामने ला रहे हैं, ताकि लोगों का ध्यान उदयपुर फाइल्स से हट जाए? वीडियो लीक होने का डर उदयपुर फाइल्स में पुलिस ने 27 मार्च को कोर्ट में चालान पेश किया था। पुलिस ने चालान में लिखा कि पीड़िता (शहर भाजपा नेत्री) संग एक व्यक्ति (कथित भाजपा नेता) आपत्तिजनक स्थिति में वीडियो में दिखा है। ऐसे में दोनों पर कार्रवाई होने की भनक लगी तो कुछ राजनेताओं ने मामले को दबाने के लिए पुराने सियासी मुर्दे उखाड़ना शुरू कर दिए। हालांकि उदयपुर फाइल्स के लीक होने का डर कई भाजपा नेताओं का आज भी सता रहा है।