होटल उद्योग को जीएसटी में राहत देने और कारोबार से जुड़ी व्यावसायिक परेशानियों के समाधान की मांग को लेकर उदयपुर होटल एसोसिएशन ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा है। एसोसिएशन ने होटल व्यवसायियों के हितों और पर्यटन उद्योग पर पड़ने वाले प्रभावों को देखते हुए जीएसटी व्यवस्था में सात प्रमुख सुधारों के सुझाव दिए हैं। ये हैं होटल एसोसिएशन की 7 प्रमुख मांगें एसोसिएशन ने पांच प्रतिशत जीएसटी वाले होटलों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की सुविधा देने, कमरे के किराए पर जीएसटी की सीमा बढ़ाने और होटल लीज पर लगने वाले जीएसटी में राहत देने सहित सात मांगें रखी हैं। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान में प्रतिदिन 7500 रुपए तक के कमरे के किराए पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगता है। हालांकि, इस श्रेणी के होटलों को आईटीसी का लाभ नहीं मिलता। ऐसे में ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियों के कमीशन, दैनिक संचालन और अन्य व्यावसायिक सेवाओं पर चुकाया गया जीएसटी होटल संचालकों के लिए अतिरिक्त लागत बन जाता है। एसोसिएशन ने पांच प्रतिशत जीएसटी वाले होटलों को भी आईटीसी देने की मांग की है। एसोसिएशन ने होटल निर्माण, पूंजीगत मरम्मत और नवीनीकरण में इस्तेमाल होने वाली लिफ्ट, सेंट्रल एयर कंडीशनिंग और अग्नि सुरक्षा प्रणाली जैसी सुविधाओं पर भी आईटीसी देने का सुझाव दिया है। रेस्टोरेंट के लिए जीएसटी की अलग व्यवस्था का सुझाव एसोसिएशन ने रेस्टोरेंट सेवाओं पर जीएसटी की दर को होटल के कमरे के किराए से स्वतंत्र रखने की मांग की है। इसके लिए दो विकल्प सुझाए गए हैं। पहला, रेस्टोरेंट को 18 प्रतिशत जीएसटी के साथ पूर्ण आईटीसी का विकल्प दिया जाए। दूसरा, पांच प्रतिशत जीएसटी और बिना आईटीसी की मौजूदा व्यवस्था जारी रखी जाए। 7500 की सीमा बढ़ाकर 10 हजार करने की मांग पत्र में होटल के कमरे के किराए पर जीएसटी की दर निर्धारित करने की मौजूदा 7500 रुपए प्रतिदिन की सीमा बढ़ाकर 10 हजार रुपए करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा होटल लीज पर लेने के मामलों में लगने वाले 18 प्रतिशत जीएसटी को भी कम करने की मांग की गई है। एसोसिएशन का कहना है कि होटल लीज पर लेने के मामलों में 18 प्रतिशत जीएसटी लगने से व्यवसायियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। पांच प्रतिशत जीएसटी वाले होटलों को इसका इनपुट टैक्स क्रेडिट भी नहीं मिलता। ऐसे में लीज राशि पर जीएसटी की दर कम करने और आईटीसी की सुविधा शुरू करने का आग्रह किया गया है। छोटे और मध्यम होटलों को मिलेगा फायदा होटल एसोसिएशन के सदस्य सहज सरूपरिया ने बताया कि राजस्थान में कई होटल लीज या किराए की संपत्तियों में संचालित हो रहे हैं। भवन मालिक के जीएसटी में अपंजीकृत होने पर होटल संचालक को रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (आरसीएम) के तहत किराए पर 18 प्रतिशत जीएसटी स्वयं चुकाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि पांच प्रतिशत जीएसटी की दर पर कमरे बेचने वाले होटलों को इस राशि का आईटीसी नहीं मिलता। इससे छोटे होटल व्यवसायियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने मांग की कि पांच प्रतिशत जीएसटी वाले होटलों को किराए पर आरसीएम से छूट दी जाए अथवा किराए पर जीएसटी की दर पांच प्रतिशत कर आईटीसी का अधिकार दिया जाए। अग्रवाल ने कहा कि इन सुझावों पर सकारात्मक विचार होने से छोटे और मध्यम श्रेणी के होटलों को मजबूती मिलेगी। घरेलू पर्यटन अधिक किफायती होगा और रोजगार के साथ आर्थिक विकास के माध्यम के रूप में पर्यटन को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों को भी बल मिलेगा। पत्र पर होटल एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गौरव कोठारी, सचिव विकास पोरवाल, उपाध्यक्ष उषा शर्मा, पूर्व अध्यक्ष सुदर्शन देव सिंह कारोही और कोषाध्यक्ष जोय सुवालका ने भी संयुक्त रूप से राहत देने की मांग की है।