आदिवासी बहुल ऋषभदेव क्षेत्र के लोगों को अब आंखों की जांच और शुरुआती इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। राष्ट्रीय अंधता रोकथाम एवं निवारण कार्यक्रम के तहत ऋषभदेव में विजन सेंटर खोलने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए उदयपुर जिले को 40 लाख रुपए का बजट आवंटित हुआ है। विजन सेंटर शुरू होने से स्थानीय स्तर पर ही आंखों की प्राथमिक जांच, नजर की पहचान और उपचार की सुविधा मिल सकेगी। राष्ट्रीय स्तर की तीन सदस्यीय टीम ने हाल ही उदयपुर का दौरा कर इस केंद्र की स्थापना के लिए चिकित्सा विभाग से प्रस्ताव मांगे हैं। टीम में डॉ. सी. अपर्णा, डॉ. सुरभि यादव और डॉ. प्रणय शर्मा शामिल रहे। दौरे के दौरान राष्ट्रीय टीम ने कलेक्टर गौरव अग्रवाल और दोनों सीएमएचओ (डॉ. अशोक आदित्य व डॉ. महेंद्र सिंह राठौड़) के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। इसमें जिले में संचालित राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति, सैटेलाइट अस्पताल (हिरणमगरी से-6) और कैलाशपुरी व मारूवास स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की सेवाओं की समीक्षा की गई। दर्जी, नाई, ड्राइवर सहित 9 पेशेवर कामगारों को मां नेत्र वाउचर टीम ने मावली उप जिला अस्पताल में मां नेत्र वाउचर योजना का भी जायजा लिया। इस योजना का उद्देश्य उन जरूरतमंदों को सहायता देना है, जिनकी आजीविका में आंखों की मुख्य भूमिका होती है। स्कूली बच्चों की मुफ्त स्क्रीनिंग कार्यक्रम में मोतियाबिंद ही नहीं, बल्कि ग्लूकोमा, डायबिटिक रेटिनोपैथी, कॉर्निया संबंधी बीमारियों और बच्चों में दृष्टि बाधिता का भी इलाज किया जाता है। सरकारी अस्पतालों में मोतियाबिंद के निशुल्क ऑपरेशन और कॉर्निया प्रत्यारोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है। स्कूलों में बच्चों की आंखों की जांच कर नजर की कमजोरी (रिफ्रेक्टिव एरर) पाए जाने पर निशुल्क चश्मे बांटे जाते हैं। कान की बीमारियों के लिए भी विशेष अभियान: जिले में राष्ट्रीय बधिरता रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम के तहत कान की जांच, ऑडियोमेट्री, स्पीच थैरेपी और जरूरत के अनुसार हियरिंग एड (सुनने की मशीन) दी जा रही है। यह सुविधा जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों व आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर उपलब्ध है, ताकि बच्चों में बहरेपन की समय रहते पहचान कर उनका पुनर्वास किया जा सके।