भगवान श्रीकृष्ण को लेकर बागेश्वर धाम के प्रमुख पं. धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री के बयान पर बवाल को लेकर वृंदावन से आए शिवम साधक महाराज ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री जी को माफी मांगने की जरूरत नहीं थी। यह तो विनोद का भाव है, कोई विवादित बयान नहीं। उन्होंने कहा कि प्रसंग में आता है पहले भी कई बार गोस्वामी तुलसी दास और सूरदास के बीच में लड़ाई हो जाती थी। सूरदास जी कहते थे कि हमारे लड्डू गोपाल जी ज्यादा बलशाली हैं वहीं तुलसीदास जी कहते थे कि हमारे राम जी ज्यादा बलवान है। यह एक विनोद का भाव है इसे कोई और नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। दरअसल, शिवम साधक महाराज अलवर में जेल चारौहा स्थित एस्ट्रोइंप्रो के ज्याेतिषाचार्य सुनील शर्मा के प्रतिष्ठान पर पहुंचे थे। यहां उन्होंने दैनिक भास्कर से खास बात की। धीरेंद्र शास्त्री को माफी मांगने की जरूरत नहीं थी उन्होंंने भास्कर से बातचीत करते हुए कहा कि धीरेंद्र शास्त्री के बयान को लेकर बवाल नहीं होना चाहिए। उन्होंने जो कहा वह तो सिर्फ विनोद का भाव है। मैं व्यक्तिगत रूप से भी शास्त्री से जुड़ा हुआ हूं। वो जब भी वृंदावन आते हैं तो सबसे पहले बांके बिहारी जी के दर्शन करते हैं। उन्होंने बहुत पहले यह भी कहा था कि हमारी हनुमान जी से फोन पर बात हुई। लोगों ने पूछा कि कैसे तो उन्होंने कहा कि यह विनोद का भाव है। कुछ बाबा खुद को भगवान मानने लगे हैं शिवम साधक महाराज ने जेल में बंद बाबाओं पर कहा कि कुछ बाबा खुद को भगवान के बराबर मानने लग गए थे। अपराध किसी कोई भी हो। सजा जरूर मिलनी चाहिए। शिवम साधक महाराज ने कहा कि जेल में बैठे कई ऐसे बाबा थे। जो पहले खुद को भगवान बताते थे। जबकि बाबा काम इंसान को भगवान से मिलाने का है। न कि खुद को भगवान के बराबर मानना। कुछ बाबा तो खुद की पूजा कराने लग गए थे। इस तरह ढोंगी बाबा होते हैं। प्रेमानंद महाराज ने दिखाया युवाओं को रास्ता प्रेमानंद माहाराज जी ने कलयुग में प्रेरणादायक गूढ़ से गूढ बातों को बहुत ही सहज शब्दों में पहुंचाकर युवा व आमजन का जीवन बदला है। उन्होंने कहा कि प्रेमानंदजी महाराज पर श्रीजी व ठाकुरजी की विशेष कृपा है। संत का मतलब है आमजन को भक्ति मार्ग पर लेकर आएं। शास्त्रों में कहीं नहीं लिखा कि मनुष्य खुद को भगवान बताए। संत का कर्तव्य यही है कि भक्त का संबंध भगवान से जोड़ दें। सरलता से भगवान का नाम कैसे लेना है और दुबारा जन्म नहीं लेना पड़े। यह मार्ग दिखाना संत का कर्तव्य है।