चित्तौड़गढ़ में जिला परिषद चुनाव में अब मुकाबला धीरे-धीरे रोचक होता जा रहा है। हॉट सीट वार्ड नंबर 16 के बाद सबसे ज्यादा चर्चा जिन सीटों की हो रही है, उनमें वार्ड नंबर 10 भी शामिल है। यहां मुकाबला सिर्फ दो प्रत्याशियों के बीच नहीं, बल्कि दो राजनीतिक परिवारों की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा है। भाजपा ने जहां कपासन पंचायत समिति के दो बार प्रधान रहे मोहब्बत सिंह राठौड़ की बहू को भावना राणावत को मैदान में उतारा है, वहीं कांग्रेस ने पूर्व डेयरी चेयरमैन और किसान नेता बद्रीलाल जाट की पत्नी रतनी बाई जाट को प्रत्याशी बनाया है। एक तरफ पहली बार चुनाव लड़ रही एमएससी पढ़ी भावना राणावत हैं, तो दूसरी तरफ पूर्व सरपंच रह चुकी रतनी बाई जाट हैं, जिन्हें पंचायत स्तर के चुनाव का अनुभव है। ऐसे में वार्ड नंबर 10 में मुकाबला राजनीतिक अनुभव, परिवार की पकड़ और स्थानीय मुद्दों के बीच बनता नजर आ रहा है। वार्ड 10 में दो राजनीतिक परिवारों की सीधी टक्कर भाजपा प्रत्याशी भावना राणावत ने एमएससी आईटी तक पढ़ाई की है। वे पहली बार चुनाव मैदान में उतरी हैं। उनके ससुर मोहब्बत सिंह राठौड़ कपासन पंचायत समिति के दो बार प्रधान रह चुके हैं। वहीं उनकी दादी सास चांद कंवर रूपाखेड़ी ग्राम पंचायत से चार बार सरपंच रह चुकी हैं। कांग्रेस प्रत्याशी रतनी बाई जाट 10वीं तक पढ़ी हैं और वर्ष 2020 में सरपंच का चुनाव जीत चुकी हैं। वर्तमान में वे गृहणी हैं और खेती भी करती हैं। उनके पति बद्रीलाल जाट किसान नेता के रूप में क्षेत्र में पहचान रखते हैं। बद्रीलाल जाट वर्ष 2020 में जिला परिषद वार्ड नंबर 1 से चुनाव जीतकर सदस्य रह चुके हैं। इसके अलावा वे डेयरी चेयरमैन भी रह चुके हैं और वर्ष 2023 में बड़ीसादड़ी विधानसभा सीट से विधायक प्रत्याशी भी रहे थे। बद्रीलाल जाट बोले- भरोसा जनता और कार्यकर्ताओं पर बद्रीलाल जाट ने पत्नी रतनी बाई जाट के चुनाव लड़ने को लेकर कहा कि वह खुद वार्ड में नहीं जा पा रहे हैं और चुनाव कार्यकर्ताओं के भरोसे लड़ रहे हैं। उन्होंने अपने पिछले जिला परिषद चुनाव का जिक्र करते हुए कहा, "मैं जिला परिषद के वार्ड नंबर 1 से चुनाव लड़ा था। उस समय भी बीजेपी सांसद सीपी जोशी तीन दिन तक वहां प्रचार करते रहे। निंबाहेड़ा विधायक श्रीचंद कृपलानी वहां का प्रचार करते रहे। अभी भी सीपी जोशी तीन दिन से मेरे वार्ड में घूम रहे हैं। मैं तो यही कहता हूं कि सीपी जोशी जी आप इतना तनाव क्यों ले रहे हो? आपको पता है कि हमने कुछ नहीं करा, इसलिए आप सबको लेकर यहां घूम रहे हो। मुझे मेरी पत्नी लड़ रही है, उसके लिए मैं नहीं जा पा रहा हूं। मुझे जनता और कार्यकर्ताओं पर भरोसा है। वो ठोक बजाकर जीता के भेजेंगे।" इसके बाद बद्रीलाल जाट ने कहा, "खौफ तो होता ही है। कोई क्या करता है? कोई माइनिंग करता है, कोई रेती का काम करता है, कोई क्या करता है। सब के सब तो मिले हुए हैं, चट्टे-बट्टे हैं। इनको खौफ नहीं रहेगा क्या। जनता की भलाई की सोचो। ये करेंगे, वो करेंगे, इसको मार देंगे, इसको जिंदा कर देंगे, इससे कुछ नहीं होता है। लोकतंत्र में जनता जो चाहती है वही होता है। जनता ही जनार्दन है, जनता ही मां-बाप है। हम तो जनता के बेटे हैं। जैसे वो रखेगी वैसे रहेंगे। जिताएगी तो जीतेंगे, हराएगी तो हारेंगे। जनता माई-बाप है।" वार्ड 6 में बदले समीकरण, पुराने मुकाबले की फिर चर्चा जिला परिषद का वार्ड नंबर 6 भी राजनीतिक रूप से काफी चर्चा में है। यहां भाजपा की ओर से बद्रीलाल जाट चुनाव मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस ने अम्बालाल शर्मा को प्रत्याशी बनाया है। खास बात यह है कि करीब 17 साल पहले हुए चुनाव से इस सीट का राजनीतिक संबंध जुड़ा हुआ है। वर्ष 2009 में पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में बद्रीलाल जाट की मां चांदी बाई जाट चुनाव लड़ी थीं और जीत हासिल की थी। उस समय कांग्रेस की ओर से अम्बालाल शर्मा उनके सामने प्रत्याशी थे। इस बार बद्रीलाल जाट खुद जिला परिषद चुनाव लड़ रहे हैं। वे पहली बार जिला परिषद चुनाव में प्रत्याशी हैं। बद्रीलाल जाट 17 जुलाई 1983 को जन्मे हैं। उन्होंने एमए और एमबीए तक पढ़ाई की है और ग्राम सेवा सहकारी समिति के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। अम्बालाल शर्मा के सामने अनुभव और स्थानीय मुद्दों का सहारा कांग्रेस प्रत्याशी अम्बालाल शर्मा 10वीं तक पढ़े हैं और किसान हैं। वे कांग्रेस में जिला महामंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। करीब 17 साल पहले वे पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ चुके हैं। दोनों सीटों पर मुद्दों के साथ राजनीतिक पकड़ की परीक्षा जिला परिषद वार्ड नंबर 10 और वार्ड नंबर 6 दोनों सीटों पर मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है। वार्ड नंबर 10 में जहां दो राजनीतिक परिवारों की प्रतिष्ठा दांव पर है, वहीं वार्ड नंबर 6 में पुराने चुनावी रिश्ते और नए राजनीतिक समीकरण आमने-सामने हैं। दोनों ही वार्ड कपासन विधानसभा में हैं। वार्ड नंबर 10 में करीब आठ ग्राम पंचायतें हैं, जबकि वार्ड नंबर 6 में भी आठ ग्राम पंचायतें और 32 राजस्व गांव शामिल हैं। दोनों सीटों पर हजारों मतदाता तय करेंगे कि राजनीतिक अनुभव, परिवार की पकड़ और स्थानीय मुद्दों में से किसका असर सबसे ज्यादा रहता है।