भास्कर न्यूज | राजसमंद विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिए मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की प्रक्रिया पर विपक्ष के विरोध को लेकर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष मानसिंह बारहठ ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। नई दिल्ली में विपक्षी दलों के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी पराजयों से बौखलाए विपक्षी दल मतदाता सूची के शुद्धिकरण को लेकर जनता में भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए सही मतदाता सूची जरूरी है। इसके बावजूद जब सूची में गड़बड़ियां दूर करने और पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू होती है तो विपक्ष विरोध करने लगता है। बारहठ ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के आरोप निराधार हैं। वर्ष 2018 में मध्यप्रदेश कांग्रेस ने मतदाता सूची में करीब 60 लाख फर्जी नाम होने का आरोप लगाकर निर्वाचन आयोग में शिकायत की थी। आम आदमी पार्टी भी दिल्ली में लाखों फर्जी नाम होने का दावा कर चुकी है। ऐसे में अब सूची की व्यापक जांच पर सवाल उठाना विपक्ष की दोहरी नीति को दर्शाता है। उन्होंने राजस्थान में एसआईआर-2026 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 27 अक्टूबर 2025 को प्रदेश में 5,46,56,215 मतदाता पंजीकृत थे। पुनरीक्षण के बाद प्रारूप सूची में 5,04,71,324 नाम शामिल हुए। दावे-आपत्तियों की जांच में 12,91,365 नए नाम जोड़े गए, जबकि 2,42,760 अपात्र नाम हटाए गए। इसके बाद 21 फरवरी 2026 को प्रकाशित अंतिम सूची में प्रारूप सूची के मुकाबले 10,48,605 मतदाताओं की शुद्ध वृद्धि दर्ज हुई, जो 2.08 प्रतिशत है। बारहठ ने बताया कि नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 के घोषणा पत्र में माता-पिता के साथ दादा-दादी या नाना-नानी का विवरण भी दिया जा सकता है। आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर सक्षम अधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से दावा प्रस्तुत करने का विकल्प भी है। उन्होंने कहा कि नाम हटाने की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया और सत्यापन के बाद ही होती है तथा संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है।