एम.असलम पंचायती राज चुनाव के तीसरे चरण में मंगलवार को जिले की पांच पंचायत समितियों और जिला परिषद के वार्डों में मतदान होगा। चुनावी मुकाबले में इस बार कई वरिष्ठ नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर है। खास बात यह है कि पूर्व जिला प्रमुखों और भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्षों की पत्नियां भी चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष के परिवार से जुड़ी महिला प्रत्याशी भी अपनी किस्मत आजमा रही हैं। इससे कई सीटों पर मुकाबला केवल प्रत्याशियों के बीच नहीं रहा। यह राजनीतिक परिवारों के प्रभाव और प्रतिष्ठा से भी जुड़ गया है। पीपलू पंचायत समिति में कई प्रमुख राजनीतिक परिवारों के सदस्य चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व जिला प्रमुख रामबिलास चौधरी की पत्नी कौशल्या चौधरी वार्ड नंबर एक से कांग्रेस प्रत्याशी हैं। कौशल्या चौधरी पहले टोंक प्रधान भी रह चुकी हैं। उनके सामने भाजपा सहित चार प्रत्याशी हैं। ऐसे में इस सीट पर उनके राजनीतिक अनुभव और पारिवारिक प्रभाव की परीक्षा होगी। इसी पंचायत समिति के वार्ड नंबर 17 से भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष और पूर्व जिला प्रमुख सत्यनारायण चौधरी की पत्नी सीता देवी चुनाव लड़ रही हैं। उनके सामने तीन प्रत्याशी हैं। कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष लक्ष्मण गाता के बेटे और कांग्रेस नेता हंसराज की पत्नी प्रियंका चौधरी वार्ड नंबर 9 से मैदान में हैं। इस वार्ड में चार प्रत्याशियों के बीच मुकाबला है। पीपलू पंचायत समिति की प्रधान सीट महिला के लिए सुरक्षित है। इसलिए प्रधान की दौड़ में वरिष्ठ नेताओं की पत्नियां भी शामिल हैं। जिला परिषद के चुनाव में भी राजनीतिक परिवारों की सक्रियता नजर आ रही है। वार्ड नंबर 29 से भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सतीश चंदेल के छोटे भाई की पत्नी रेखा चंदेल चुनाव लड़ रही हैं। इस सीट पर उनका सीधा मुकाबला कांग्रेस की ममता से है। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सत्यनारायण चौधरी के भाई अजय कुमार चौधरी वार्ड नंबर 28 से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में हैं। जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव में अधिकांश प्रत्याशी नए चेहरे हैं। कुछ सीटों पर पुराने राजनीतिक परिवारों की मौजूदगी ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। अब मतदाताओं का फैसला तय करेगा कि नेताओं के पारिवारिक प्रभाव और पुराने राजनीतिक अनुभव को कितना समर्थन मिल पाता है।